द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालते ही नितिन नवीन ने साफ संकेत दे दिया है कि संगठन अब सीधे चुनावी मोड में आ चुका है। अध्यक्ष पद की शपथ लेने के महज कुछ ही दिनों के भीतर नितिन नवीन आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम शुरू कर चुके हैं। इसी कड़ी में वे 27 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे, जहां पार्टी के कोर ग्रुप और वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरे को नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के बाद पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है।
नितिन नवीन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण राज्यों में से एक बना हुआ है। संगठन के भीतर यह माना जा रहा है कि बंगाल में बिना जमीनी मजबूती और स्पष्ट रणनीति के आगे बढ़ना संभव नहीं है। इसी वजह से नितिन नवीन सीधे संगठन की नब्ज टटोलने और चुनाव से पहले पार्टी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के इरादे से राज्य का रुख कर रहे हैं।
अध्यक्ष बनने से पहले ही बंगाल नेताओं से साधा था संपर्क
अध्यक्ष पद की औपचारिक जिम्मेदारी संभालने से पहले ही नितिन नवीन बंगाल भाजपा के नेताओं के संपर्क में थे। नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, बालुरघाट सांसद सुकांत मजूमदार और पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों के साथ लंबी बैठक की थी। इन बैठकों को संगठनात्मक निरंतरता और संदेश देने की कवायद के तौर पर देखा गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन की प्राथमिकता साफ है राज्य इकाइयों को सिर्फ निर्देश नहीं, बल्कि सुनने और समझने का मंच देना।
कोर ग्रुप बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
27 जनवरी को होने वाली बैठकों में संगठनात्मक ढांचे, बूथ स्तर की स्थिति, कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर पार्टी की रणनीति भी चर्चा का अहम हिस्सा हो सकती है। भाजपा नेतृत्व इसे मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के तौर पर देख रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक हथकंडा करार दे रहा है।
टीएमसी का तंज- ‘पहले भी आए, फर्क नहीं पड़ा’
नितिन नवीन के बंगाल दौरे पर तृणमूल कांग्रेस ने पहले से ही हमला बोल दिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं के दौरे पहले भी होते रहे हैं, लेकिन चुनावी नतीजों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। टीएमसी की ओर से यह भी कहा गया कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी संगठन समीक्षा के नाम पर बंगाल दौरे किए थे, लेकिन अंततः पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।
पांच राज्यों पर नजर, बंगाल बना टेस्ट केस
नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को मिशन मोड में लिया जाए। उन्होंने सनातन परंपराओं की रक्षा, सामाजिक संतुलन और जनसांख्यिकीय बदलावों को चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा बनाने की बात भी कही। ऐसे में बंगाल दौरा सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि नितिन नवीन के नेतृत्व की दिशा और कार्यशैली का संकेतक माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह साफ चर्चा है कि नितिन नवीन के लिए पश्चिम बंगाल वह प्रयोगशाला हो सकता है, जहां से उनके अध्यक्षीय कार्यकाल की असली तस्वीर उभरकर सामने आएगी।

