द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : UGC Bill 2026 को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) का आधिकारिक रुख सामने आ गया है। पार्टी के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि भारत का संविधान डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाया गया है और इसमें हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में समाज के किसी भी वर्ग में उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
न्याय के साथ विकास और सबका सम्मान
नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘न्याय के साथ विकास और सबका सम्मान’ की राजनीति के रोल मॉडल रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UGC के नए रेगुलेशन को लेकर समाज में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन अब चूंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, इसलिए न्यायपालिका का निर्णय ही अंतिम और सर्वमान्य होगा। जेडीयू का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं का सम्मान और संवैधानिक प्रक्रिया पर भरोसा सबसे जरूरी है।
इस बीच यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि UGC Equity Regulations 2026 का इतना विरोध क्यों हो रहा है। दरअसल, इसी महीने लागू हुए इन नए नियमों में OBC वर्ग को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। इसके साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधानों को हटा दिया गया है। सामान्य वर्ग के कई संगठनों और छात्रों का आरोप है कि इससे कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है और गलत शिकायत करने वालों पर किसी तरह की सजा का डर नहीं रह गया है।
UGC नियमों को लेकर सियासी पारा हाई
इन नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी पारा खासा चढ़ गया है। भाजपा से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराते हुए इस्तीफे तक दे दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां नई गाइडलाइंस को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है और कुछ वर्गों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि मौजूदा स्वरूप में इन नियमों के लागू होने पर रोक लगाई जाए और जाति-आधारित भेदभाव को ‘जाति-तटस्थ और संविधान के अनुरूप’ नए सिरे से परिभाषित किया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश दिए जाएं, ताकि ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी व्यवस्थाएं बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए उपलब्ध रहें।
कुल मिलाकर, UGC Bill 2026 पर जेडीयू ने टकराव की बजाय संतुलन का रास्ता चुना है और साफ कर दिया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम शब्द संविधान और सुप्रीम कोर्ट का ही होना चाहिए।

