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UGC नियमों पर सियासी घमासान तेज, कांग्रेस ने लगाए ‘समाज को बांटने’ के आरोप, सरकार ने दी सफाई

Political controversy intensifies over UGC rules; Congress alleges attempts to 'divide society', government issues clarification.

द लोकतंत्र/ लखनऊ : नई UGC (University Grants Commission) नियमावली को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए इन नियमों पर जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं केंद्र सरकार ने साफ किया है कि कानून का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यूजीसी के जरिए समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।

अजय राय ने कहा कि पहले सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए हिंदू-मुस्लिम का सहारा लेती थी और अब यूजीसी के माध्यम से लोगों को आपस में बांटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अंतिम दौर में है और सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव तरीका अपना रही है। राय ने यह भी आरोप लगाया कि बड़े उद्योगों पर कुछ चुनिंदा राज्यों के उद्योगपतियों का कब्जा है और देश में भीतरू विभाजन पैदा किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने दोहराया कि उनकी पार्टी इस कोशिश को सफल नहीं होने देगी और कांग्रेस के लिए सभी वर्ग एकजुट हैं।

केंद्र सरकार की सफाई: ‘न भेदभाव होगा, न दुरुपयोग’

इन आरोपों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि नए यूजीसी नियमों का किसी भी तरह से गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और इनके लागू होने में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा। प्रधान का बयान उन चिंताओं के बाद आया है, जो 13 जनवरी को अधिसूचित नए नियमों को लेकर सामने आईं। ये नियम 2012 की गाइडलाइंस को अपडेट करते हैं और कॉलेजों–विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

छात्रों का विरोध और सड़कों पर प्रदर्शन

नए नियमों के खिलाफ खासतौर पर सामान्य वर्ग के छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि विशेष समितियों और हेल्पलाइनों की व्यवस्था से उनके खिलाफ भेदभाव की आशंका बढ़ सकती है। इसी के चलते लखनऊ विश्वविद्यालय के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन किया और यूजीसी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।

बीजेपी नेता का इस्तीफा, असंतोष खुलकर सामने

विवाद के बीच सत्तारूढ़ दल में भी असंतोष दिखा। रायबरेली के सलोन क्षेत्र से बीजेपी किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि नया कानून समाज के लिए खतरनाक और विभाजनकारी है तथा इसे समर्थन देना उनके आत्मसम्मान और विचारधारा के खिलाफ है।

इसी मुद्दे पर बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संवैधानिक व्यवस्था के विफल होने का आरोप लगाया और दावा किया कि यूजीसी नियमों के खिलाफ उन्हें कई राज्यों से समर्थन मिल रहा है। अग्निहोत्री के मुताबिक, ये नियम देश के लिए गंभीर नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।

देशव्यापी बहस के केंद्र में UGC नियम

कुल मिलाकर, यूजीसी के नए नियम अब शिक्षा से आगे बढ़कर एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे में बदल चुके हैं। जहां सरकार इन्हें समानता और न्याय की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और कई छात्र संगठन इसे विभाजनकारी करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और तेज होने के संकेत दे रहा है।

Team The Loktantra

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