द लोकतंत्र : देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनके कार्यकाल का लगातार नौंवा बजट होगा। बजट की तैयारी के बीच, भारत के वित्तीय इतिहास का एक ऐसा पन्ना भी है जिसने हमारी अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी। वह था—रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय।
कभी रेलवे का बजट इतना बड़ा होता था कि उसे पेश करने के लिए अलग दिन तय किया जाता था, लेकिन 2017 में 92 साल पुरानी यह परंपरा हमेशा के लिए खत्म हो गई। आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।
क्यों अलग पेश होता था रेल बजट?
रेल बजट को अलग रखने की शुरुआत 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। उस समय ‘एक्वर्थ कमेटी’ ने इसकी सिफारिश की थी। वजह यह थी कि तब भारतीय रेलवे पर होने वाला खर्च सरकार के कुल खर्च का लगभग 84% था। यानी रेलवे ही अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ थी। इतने भारी भरकम हिसाब-किताब को आम बजट के साथ संभालना उस दौर में नामुमकिन था।
दबदबे से गिरावट तक का सफर
आजादी से पहले और उसके कुछ सालों बाद तक रेलवे का राजस्व और खर्च बहुत ज्यादा था। लेकिन समय बदला और देश में दूसरे सेक्टर्स (जैसे रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य) का विस्तार हुआ। 2016 तक आते-आते हालत यह हो गई कि सरकारी खर्च में रेलवे का हिस्सा 84% से घटकर सिर्फ 15% रह गया। अब एक अलग बजट पेश करने का कोई बड़ा ठोस कारण नहीं बचा था।
कैसे हुआ बजटों का ‘महा-विलय’?
2016 में नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने सिफारिश की कि अब रेल बजट को आम बजट में मिला देना चाहिए। सरकार ने इस सुझाव को मान लिया और 1 फरवरी 2017 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश का पहला ‘संयुक्त बजट’ पेश किया।
विलय से रेलवे को क्या हुआ फायदा?
इस बदलाव ने न केवल बजट बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाया, बल्कि रेलवे को एक बहुत बड़ी राहत भी दी।
- सालाना डिविडेंड से आजादी: पहले रेलवे को हर साल केंद्र सरकार को लाभांश (Dividend) देना पड़ता था, जो विलय के बाद खत्म हो गया।
- बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर: डिविडेंड के पैसे बचने से रेलवे के पास आधुनिकीकरण, सुरक्षा सुधार और नई पटरियों के लिए ज्यादा फंड उपलब्ध होने लगा।
- पारदर्शिता: संसाधनों का बंटवारा अब ज्यादा कुशलता से होने लगा है।
1 फरवरी को जब निर्मला सीतारमण अपना बजट भाषण शुरू करेंगी, तो उसमें रेलवे की नई योजनाओं और सुरक्षा के लिए किए गए आवंटन का भी पूरा ब्यौरा होगा। रेल बजट का विलय भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ है।

