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गजनी-लोदी बयान को लेकर हामिद अंसारी पर BJP का तीखा पलटवार, शहजाद पूनावाला बोले – ‘ये पैटर्न है, संयोग नहीं’

The BJP launched a sharp counter-attack on Hamid Ansari over his remarks on Ghazni and Lodi, with Shehzad Poonawalla saying, "This is a pattern, not a coincidence."

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मध्यकालीन भारतीय इतिहास को लेकर दिए गए एक बयान ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को देश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार पलटवार करते हुए विपक्ष पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर हुई हिंसा को कमतर दिखाने का आरोप लगाया। बीजेपी का कहना है कि यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक सोची-समझी वैचारिक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह टिप्पणी कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि उसी पैटर्न को दोहराती है जिसमें भारत के मध्यकालीन अतीत को ‘क्लीन चिट’ देने की कोशिश होती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इकोसिस्टम बार-बार विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों को हल्का साबित करने का प्रयास करता है। पूनावाला ने कहा कि पहले शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे लोगों को ‘युवा नेता’ बताया गया और अब महमूद गजनी जैसे आक्रांताओं के कृत्यों को सामान्य ठहराया जा रहा है।

महमूद गजनी ने भारत के पवित्र धार्मिक स्थलों, विशेषकर सोमनाथ मंदिर को अपवित्र किया

बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि महमूद गजनी वही शासक था जिसने भारत के पवित्र धार्मिक स्थलों, विशेषकर सोमनाथ मंदिर को अपवित्र किया। उनके अनुसार, इतिहास में दर्ज घटनाओं को राजनीतिक सुविधा के अनुसार नया रंग देना न केवल तथ्यों से खिलवाड़ है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजनों का विरोध करती रही है और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को नजरअंदाज करती है।

इस मुद्दे पर बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता सीआर केसवन ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हामिद अंसारी की टिप्पणी बेहद चौंकाने वाली है, खासकर तब जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने उन्हें दो बार उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। केसवन ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ऐसे बयानों से सहमत हैं, जिनमें मंदिर विध्वंस और हजारों लोगों की हत्या जैसे ऐतिहासिक तथ्यों को महज़ घरेलू घटनाओं की तरह पेश किया जा रहा है।

मुग़ल क्रूरता को सामान्य ठहराना सनातन संस्कृति की जड़ों पर प्रहार

सीआर केसवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हामिद अंसारी का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि आठवीं शताब्दी से लेकर मुगल काल तक हिंदू धर्मस्थलों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने महमूद गजनी द्वारा भारत पर किए गए बार-बार के आक्रमणों और मथुरा व सोमनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के विनाश का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी क्रूरता को सामान्य ठहराना सनातन संस्कृति की जड़ों पर प्रहार है।

दरअसल, यह सारा विवाद हामिद अंसारी के एक हालिया इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन शासकों को पाठ्यपुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारी कहा जाता है—चाहे वे महमूद गजनी हों या लोदी वंश, वे बाहर से आए हुए विदेशी नहीं थे, बल्कि यहीं के शासक थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से उन्हें विदेशी बताना सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह सही नहीं है।

बीजेपी का कहना है कि इस तरह की व्याख्याएं इतिहास के उन अध्यायों को धुंधला करने की कोशिश हैं, जिनमें आक्रमण, धार्मिक हिंसा और सांस्कृतिक विनाश के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं। पार्टी ने साफ किया कि इतिहास के साथ किसी भी तरह का “रीराइट” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे पर वैचारिक लड़ाई जारी रहेगी।

Team The Loktantra

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