द लोकतंत्र : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर पूरी दुनिया में इस वक्त डर और उम्मीद दोनों का माहौल है। जहां कुछ लोग इसे तरक्की का रास्ता मान रहे हैं, वहीं जानकारों का मानना है कि यह तकनीक दुनिया को ऐसे रूप में बदल देगी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
हाल ही में दुबई में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान वैश्विक रोजगार के भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ी चेतावनी सामने आई है। दुबई के मशहूर कारोबारी और डेमाक ग्रुप (DAMAC Group) के चेयरमैन हुसैन सजवानी ने भारत को विशेष रूप से आगाह करते हुए कहा है कि एआई का सबसे बुरा असर उन देशों पर पड़ेगा जो ‘आउटसोर्सिंग’ के भरोसे हैं।
100 गुना तक बदल जाएगी दुनिया
हुसैन सजवानी का कहना है कि इंटरनेट के आने से जो क्रांति हुई थी, एआई उससे कहीं ज्यादा ताकतवर साबित होगा। उनके मुताबिक, “एआई के आने से दुनिया 10 गुना नहीं, बल्कि 100 गुना तक बदल सकती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश और कंपनियां इस बदलाव के हिसाब से खुद को नहीं ढालेंगी, वे इतिहास बनकर रह जाएंगी। एआई केवल छोटे-मोटे काम नहीं छीनेगा, बल्कि यह काम करने के पूरे तरीके को ही बदल देगा।
भारत के लिए क्यों है यह ‘खतरे की घंटी’?
सजवानी की इस टिप्पणी ने भारत में चिंता बढ़ा दी है। भारत को पूरी दुनिया का ‘आउटसोर्सिंग हब’ माना जाता है। हमारी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आईटी (IT) सेक्टर, बीपीओ (BPO), और कॉल सेंटर्स पर टिका है, जहाँ लाखों युवाओं को रोजगार मिलता है।
ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि ऑटोमेशन हमेशा इंसानी मेहनत की जगह लेता है। सजवानी ने चेतावनी दी कि जो काम पहले लोग सस्ते श्रम (Outsource Labour) के रूप में करते थे, अब वही काम एआई कहीं ज्यादा तेजी और कम खर्च में कर देगा। ऐसे में बैक-ऑफिस सेवाओं और डेटा एंट्री जैसे क्षेत्रों में नौकरियों के कम होने का बड़ा जोखिम है।
क्या है बचाव का रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब केवल ‘सस्ता श्रम’ उपलब्ध कराने वाले देश की इमेज से बाहर निकलना होगा। हमें अपनी वर्कफोर्स को री-स्किल (Re-skill) करने की जरूरत है।
- नया हुनर: युवाओं को एआई के साथ काम करना सीखना होगा।
- इनोवेशन: केवल दूसरों का काम करने के बजाय खुद की तकनीक और सॉफ्टवेयर बनाने पर जोर देना होगा।
- बदलाव को अपनाना: सरकारी और निजी स्तर पर एआई आधारित शिक्षा और ट्रेनिंग को बढ़ाना होगा।
हुसैन सजवानी की चेतावनी एक आईना है। तकनीक को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते खुद को बदलकर हम इस खतरे को एक बड़े अवसर में बदल सकते हैं। भारत के लिए यह अपनी आईटी ताकत को नए सिरे से परिभाषित करने का समय है।

