द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि Budget 2026 पेश करते हुए साफ कर दिया है कि सरकार का विज़न अब सिर्फ अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं है। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में खेती को एक मल्टी-डायमेंशनल सेक्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां किसान केवल फसल उगाने वाले नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ेंगे। इस बजट का मूल उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, खेती को टिकाऊ बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अगर खेती में विविधता लाई जाए और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ डेयरी, मुर्गी पालन, बागवानी और विशेष फसलों को बढ़ावा दिया जाए, तो किसानों को आय के कई स्रोत मिल सकते हैं। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
डेयरी और मुर्गी पालन को मिलेगा मजबूत सहारा
कृषि बजट 2026 में डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को खास प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश के लाखों छोटे और सीमांत किसान इन क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। सरकार चाहती है कि किसान दूध, अंडा और उससे जुड़े उत्पादों के जरिए स्थायी और नियमित आमदनी हासिल कर सकें। इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और बाजार तक सीधी पहुंच को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
नारियल उत्पादन में भारत की ताकत, किसानों को मिलेगा नया सहारा
बजट भाषण में नारियल किसानों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने बताया कि भारत दुनिया में नारियल उत्पादन में अग्रणी है और करीब 3 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। सरकार प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में नई सुविधाएं स्थापित करेगी, जिससे किसानों को तकनीकी सहायता, बेहतर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही नारियल से बनने वाले तेल, रेशा और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसानों की कमाई बढ़ सके।
काजू, कोको और चंदन को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
कृषि बजट 2026 में काजू और कोको जैसी फसलों को नई पहचान देने की योजना बनाई गई है। इन उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के लिए किसानों और उद्यमियों को विशेष सहायता दी जाएगी, ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके अलावा चंदन की खेती को भी दोबारा प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे किसानों को उच्च मूल्य वाली फसल का विकल्प मिलेगा।
नॉर्थ ईस्ट राज्यों पर खास फोकस
पूर्वोत्तर भारत के लिए भी कृषि बजट 2026 में विशेष योजनाएं शामिल की गई हैं। इस क्षेत्र में बादाम, मूंगफली और अन्य खास फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों की आय बढ़े और क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके। कुल मिलाकर, कृषि बजट 2026 एक ऐसा रोडमैप पेश करता है, जिसमें खेती को आय, रोजगार और निर्यात से जोड़ने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। यह बजट किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम माना जा रहा है।

