द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में दिए गए बयान पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाई का बचाव करते हुए कहा कि राहुल गांधी कभी भी सेना को बदनाम नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में जो पढ़ा जा रहा था, वह पूर्व सेना प्रमुख की किताब का प्रकाशित अंश है, फिर उसे बोलने से रोकने की क्या वजह है?
प्रियंका गांधी ने कहा, वह आर्मी चीफ की किताब का एक हिस्सा पढ़ रहे थे। इसमें बदनाम करने वाली क्या बात है? नियम के अनुसार पब्लिक सोर्स होना चाहिए, चाहे वह किताब हो या मैगजीन। यह अंश मैगजीन में प्रकाशित हो चुका है, यानी यह अप्रमाणित स्रोत नहीं है। फिर समस्या क्या है? अगर सब कुछ ठीक है तो मोदी सरकार डर क्यों रही है?
‘56 इंच की छाती’ वाले बयान पर घमासान
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार इस बात से घबराई हुई है कि अगर एम. एम. नरवणे की किताब की बातें सामने आ गईं, तो देश को यह पता चल जाएगा कि चीन के सामने ‘56 इंच की छाती’ का क्या हुआ। राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार केवल एक लाइन से डरी हुई है और वही लाइन वे संसद के भीतर पढ़कर सुनाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा में गतिरोध बना रहा। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई और अंततः शाम 4:10 बजे के बाद मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दी गई।
‘सरकार सच से भाग रही है’- राहुल गांधी
सदन स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा कि नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और पूरी सरकार सिर्फ एक लाइन से डर रही है। उन्होंने कहा, “वह लाइन मैं संसद में बोलूंगा, मुझे कोई नहीं रोक पाएगा।” बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने लिखा कि पूर्व सेना प्रमुख का बयान यह उजागर करेगा कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने सेना को किस तरह निराश किया।
सरकार का पलटवार: ‘सेना का मनोबल गिराने की कोशिश’
सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी काल्पनिक बातों से सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, आप देश को नीचा दिखाकर क्या कहना चाहते हैं? आप ऐसी बातें कर रहे हैं जिनका कोई ठोस आधार नहीं है। ऐसी कोई बात मत बोलिए जिससे सेना का मनोबल गिरे।
राजनीतिक तापमान और बढ़ने के संकेत
इस पूरे प्रकरण ने संसद के भीतर और बाहर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है, वहीं सरकार का आरोप है कि विपक्ष सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति कर रहा है। आने वाले सत्रों में यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।

