द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : इन दिनों सोशल मीडिया पर हरियाणा के चर्चित यूट्यूबर Arun Panwar की शादी जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह है शादी में मिला कथित ‘लग्न-टीका’, जिसमें लाखों रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना दिए जाने का दावा किया गया है। इस पूरी घटना का वीडियो खुद अरुण पंवार ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और दहेज को लेकर एक नई बहस छिड़ गई।
वीडियो में दावा किया गया है कि यह दहेज नहीं, बल्कि ‘दान’ है। हालांकि 71 लाख रुपये कैश और 21 तोला सोना देखकर कई लोग हैरान हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिर्फ नाम बदल देने से दहेज की परिभाषा बदल जाती है।
रील में गिनाई गई नकदी और गहनों की सूची
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कागज हाथ में लेकर शादी में दिए गए गहनों और नकदी का पूरा विवरण पढ़ता नजर आता है। वीडियो के अनुसार, दूल्हे को लगभग साढ़े पांच तोले की सोने की चेन, चार तोले का ब्रेसलेट और दो सोने की अंगूठियां दी गईं। इतना ही नहीं, दूल्हे के पिता, ताऊ, भाइयों, मां और अन्य रिश्तेदारों के लिए भी सोने के गहने दिए जाने की बात कही गई।
बताया गया कि कुल मिलाकर 21 तोला सोना और 71 लाख रुपये नकद दिए गए, जिसे ‘दान’ का नाम दिया गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि अरुण पंवार की पत्नी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं, फिर भी इतनी बड़ी रकम और गहनों के लेनदेन ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
‘शादी है या सौदा?’- सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे खुलेआम नकद लेनदेन बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यह शादी है या सौदा। कुछ लोगों का कहना है कि लड़की कितनी भी पढ़-लिख जाए, दहेज की परंपरा अब भी समाज में जड़ें जमाए हुए है।
एक यूजर ने टिप्पणी की कि ‘नाम चाहे दान रखो या लग्न-टीका, 71 लाख कैश और सोना दिखावा ही है। दहेज कानूनन अपराध है और इस तरह की रील बनाकर उसका महिमामंडन करना गलत संदेश देता है।’ वहीं दूसरे यूजर ने साफ कहा कि कोई कुछ भी कहे, लेकिन यह दहेज ही है।
दहेज प्रथा पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना ने एक बार फिर दहेज जैसी सामाजिक कुरीति पर चर्चा तेज कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो साझा करना दहेज को सामान्य बनाने की कोशिश है, या फिर यह समाज को इस मुद्दे पर खुलकर बहस करने का मौका दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज निषेध कानून के बावजूद इस तरह के मामलों का सामने आना यह दिखाता है कि जागरूकता और सामाजिक बदलाव की अब भी जरूरत है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी घटनाएं तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं और समाज के सामने कई असहज सवाल खड़े कर देती हैं।
कुल मिलाकर, अरुण पंवार की शादी से जुड़ा यह विवाद सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दहेज, सामाजिक मान्यताओं और आधुनिक सोच के बीच चल रही खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि यह बहस समाज में किसी सकारात्मक बदलाव की दिशा में जाती है या फिर कुछ समय बाद एक और वायरल खबर बनकर रह जाती है।

