द लोकतंत्र : हम अक्सर मुंह में होने वाले छोटे-छोटे छालों या लाल-सफेद दागों को पेट की खराबी या विटामिन की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। ज्यादातर मामलों में ये ठीक भी हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टरों की मानें तो हर छाला साधारण नहीं होता। ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो शुरुआत में बहुत ही दबे पांव आती है।
जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे तब पहचान पाते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। आज 5 फरवरी 2026 की इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि मुंह के छोटे-छोटे बदलाव कब बड़े खतरे का संकेत बन सकते हैं।
क्यों पकड़ में नहीं आता शुरुआती ओरल कैंसर?
ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं, जिनमें अक्सर दर्द भी नहीं होता। लोग इसे तनाव या दांतों की रगड़ से हुआ घाव मान लेते हैं। चूंकि यह बीमारी अक्सर तंबाकू, धूम्रपान और शराब की आदतों से जुड़ी होती है, इसलिए कई लोग झिझक के कारण डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। यही देरी इलाज को मुश्किल बना देती है।
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में ओरल हेल्थ को लेकर लोग काफी लापरवाह हैं। सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत उन्हें है जो:
- लंबे समय से तंबाकू चबा रहे हैं या धूम्रपान करते हैं।
- शराब का अधिक सेवन करते हैं।
- जिनके दांत टूटे हुए या नुकीले हैं, जो बार-बार जीभ या गाल को काटते हैं।
- जिनकी ओरल हाइजीन (मुंह की सफाई) खराब है।
कैंसर की चेतावनी: इन 4 तरह के पैच को पहचानें
मुंह के अंदर दिखने वाले पैच कई तरह के हो सकते हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए:
- सफेद पैच (ल्यूकोप्लाकिया): मसूड़ों या जीभ पर सफेद धब्बे जो रगड़ने से भी नहीं हटते।
- लाल पैच (एरिथ्रोप्लाकिया): ये पैच ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं और इनमें से खून भी आ सकता है।
- जालीदार पैच: मुंह के अंदर सफेद जाली जैसा दिखना जिसमें जलन महसूस हो।
- 2 हफ्ते का नियम: कोई भी ऐसा छाला जो 14 दिनों के अंदर ठीक न हो, वह खतरे की घंटी है।
डॉक्टर से कब मिलना है बेहद जरूरी?
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत स्पेशलिस्ट से संपर्क करें:
- मुंह में कोई ऐसी गांठ महसूस होना जो पहले नहीं थी।
- निगलने, चबाने या बोलने में परेशानी होना।
- जीभ या मुंह के किसी हिस्से का सुन्न पड़ जाना।
- बिना किसी कारण के मुंह से खून आना।
- गर्दन के पास लिम्फ नोड्स (गांठों) में सूजन आना।
ओरल कैंसर का अगर शुरुआती स्टेज पर पता चल जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है। अपनी आदतों पर काबू रखें और मुंह के अंदर होने वाले छोटे से छोटे बदलाव पर भी पैनी नजर रखें। याद रखें, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

