द लोकतंत्र : महाशिवरात्रि का पावन पर्व आने वाला है और शिवभक्त इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। महादेव को प्रसन्न करने के लिए लोग उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से हर मनोकामना पूरी होती है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भक्ति के साथ-साथ शरीर की क्षमता को समझना भी उतना ही जरूरी है? शास्त्रों और डॉक्टरों दोनों का मानना है कि महाशिवरात्रि का कठिन व्रत हर किसी के लिए सही नहीं होता। आइए जानते हैं कि किन्हें इस बार व्रत रखने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
1. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को दोगुने पोषण की जरूरत होती है। ऐसे में निर्जला या बहुत कठिन व्रत रखने से गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
- सलाह: यदि आप उपवास रखना ही चाहती हैं, तो पहले डॉक्टर से बात करें। आप कठिन व्रत के बजाय फलाहार, जूस या बिना नमक वाले हल्के भोजन का विकल्प चुन सकती हैं।
2. गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग
अगर आप डायबिटीज (मधुमेह), हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या किडनी की समस्या से परेशान हैं, तो खाली पेट रहना आपके लिए खतरनाक हो सकता है।
- डायबिटीज: लंबे समय तक भूखा रहने से शुगर लेवल गिर सकता है (Hypoglycemia), जो जानलेवा हो सकता है। बुजुर्गों को भी अपनी उम्र और दवाओं के असर को देखते हुए व्रत से परहेज करना चाहिए।
3. महिलाओं के लिए मासिक धर्म के नियम
अक्सर महिलाओं के मन में उलझन रहती है कि क्या वे मासिक धर्म (Periods) के दौरान व्रत रख सकती हैं।
- नियम: शास्त्रों के अनुसार, इस अवस्था में आप व्रत रख सकती हैं, लेकिन आपको मंदिर जाने या शिवलिंग को छूने से बचना चाहिए। आप घर पर रहकर मानसिक रूप से मंत्र जाप (जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’) कर सकती हैं, महादेव आपकी श्रद्धा को स्वीकार करेंगे।
4. अगर व्रत न रख पाएं तो क्या करें?
शास्त्रों में ‘भाव’ को प्रधान माना गया है। यदि स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण आप उपवास नहीं रख सकते, तो परेशान न हों। आप इन तरीकों से भी शिव कृपा पा सकते हैं:
- भगवान शिव का मानसिक ध्यान और मंत्र जाप करें।
- सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक चीजों (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से दूर रहें।
महादेव बहुत भोले हैं और वे केवल आपकी सच्ची श्रद्धा देखते हैं। अपनी सेहत को जोखिम में डालकर व्रत रखना उचित नहीं माना जाता। इसलिए, शरीर की स्थिति को समझें और उसी के अनुसार अपनी पूजा-पद्धति चुनें।

