द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद Hibi Eden ने कहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) किसानों के मुद्दों को उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए उन्हें अपनी संसदीय सदस्यता या राजनीतिक भविष्य की परवाह नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में यह तय किया गया कि प्रस्तावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और किसानों से जुड़े सवालों को संसद के भीतर और बाहर मजबूती से उठाया जाएगा। ईडन के अनुसार, राहुल गांधी किसी भी परिस्थिति में किसानों की आवाज दबने नहीं देंगे और भारत के हितों से समझौता नहीं होने देंगे।
कांग्रेस सांसद Vamsi Krishna Gaddam ने भी व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है। गड्डम ने सवाल उठाए कि देश को अमेरिकी प्रशासन के दबाव में फैसले क्यों लेने पड़ रहे हैं, किसानों की सुरक्षा करने वाले टैरिफ क्यों घटाए जा रहे हैं और रुपये के अवमूल्यन जैसे आर्थिक विषयों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही। उनका कहना था कि जब ऐसे गंभीर प्रश्न उठाए जाते हैं, तो ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।
राहुल गांधी पर विशेष जांच की मांग, सियासी टकराव बढ़ा
वहीं भारतीय जनता पार्टी के सांसद Nishikant Dubey ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर राहुल गांधी के हालिया संसदीय भाषण के बाद उनके कथित “अनुचित आचरण” की जांच के लिए एक विशेष संसदीय समिति गठित करने की मांग की है। दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता देश को गुमराह कर रहे हैं और ऐसी ताकतों से जुड़े हैं जो देश की स्थिरता को प्रभावित करना चाहती हैं। उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की भी मांग की है।
इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने संकेत दिया कि भाजपा सांसद राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकते हैं। जवाब में राहुल गांधी ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे किसानों के अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और यदि सरकार चाहती है तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

