द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेर रही है, जबकि केंद्र सरकार विपक्ष पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं है और वे किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष के पास मोदी सरकार की आलोचना के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह झूठे और मनगढ़ंत दावे कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हताशा में ऐसे बयान दे रही है, जिनका तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। मंत्री के अनुसार, ट्रेड डील को लेकर सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है – किसानों और देश के आर्थिक हितों की रक्षा।
किसानों के मुद्दे पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित ट्रेड डील की कुछ शर्तें भारत के किसानों, विशेषकर कपास उत्पादकों और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका के मुकाबले भारत को 18 प्रतिशत टैरिफ की स्थिति में क्यों रखा जा रहा है, जबकि वहां शून्य टैरिफ की व्यवस्था है। कांग्रेस का दावा है कि इससे घरेलू उद्योग और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि जब ‘अपरिपक्व लोग’ राजनीति में आते हैं तो ऐसे बयान सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की कपास उत्पादन क्षमता और आवश्यकता दोनों बढ़ रही हैं, और वैश्विक व्यापार में कच्चा माल आयात कर उसे प्रोसेस कर निर्यात करना एक सामान्य और स्थापित प्रक्रिया है।
सरकार का दावा: किसानों के हित सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ वार्ता के दौरान सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, जिन क्षेत्रों में भारत आत्मनिर्भर है और जहां घरेलू उत्पादन मजबूत है, उन्हें डील के दायरे से बाहर रखा गया है।
पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी। उनका कहना है कि यह डील भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जारी यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे किसानों, उद्योग और व्यापार से जुड़ा है। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस पर तीखी बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

