द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर हैदराबाद स्थित दारुस्सलाम मुख्यालय में आयोजित जनसभा में सांसद Asaduddin Owaisi ने केंद्र सरकार और कथित ‘फिरकापरस्त ताकतों’ पर तीखा हमला बोला। बिहार के विधायकों और महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित निकाय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ओवैसी ने सोशल इम्पैक्ट रिकॉर्ड/सर्वे (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा था कि सरकार NPR और NRC की जगह अब SIR के माध्यम से नागरिकता के मुद्दे को आगे बढ़ा सकती है।
अपने संबोधन की शुरुआत में ओवैसी ने 14 फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 40 सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लोगों से अपने मोबाइल की रोशनी जलाकर शहीदों को याद करने की अपील की और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
हक मांगने वालों को बनाया जा रहा दुश्मन: ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि देश में जो लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें विरोधी या दुश्मन के रूप में पेश किया जाता है। उन्होंने दलितों, आदिवासियों और बेरोजगार युवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग संविधान और अपने अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि विविधता ही भारत की असली ताकत है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की खूबसूरती अलग-अलग धर्मों और उनकी इबादतगाहों में निहित है। उनके अनुसार, मंदिर की घंटियों और मस्जिदों की अज़ान की आवाज साथ-साथ गूंजना ही भारत की सांस्कृतिक पहचान है।
SIR और नागरिकता पर नई बहस
अपने भाषण के अहम हिस्से में ओवैसी ने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। उनका दावा था कि बिहार के बाद तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी SIR प्रक्रिया लागू हो सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने नाम और दस्तावेजों को सही ढंग से दर्ज करवाएं। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास किसी की नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है, लेकिन सरकार संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से यह प्रयास कर सकती है।
हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद और मौलवी अलाउद्दीन के विद्रोह का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने पार्टी के विस्तार और राजनीतिक मजबूती की बात की। महाराष्ट्र और बिहार में संगठन की सक्रियता को उन्होंने AIMIM की बढ़ती उपस्थिति का संकेत बताया। पार्टी के स्थापना दिवस पर दिए गए इस भाषण को अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। SIR को लेकर उठाए गए सवालों ने आने वाले समय में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।

