द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार से इस समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Salman Khurshid ने कहा कि सरकार बार-बार यह कह रही है कि विपक्ष गलत जानकारी फैला रहा है, लेकिन यदि ऐसा है तो ट्रेड डील से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सामने रखे जाएं।
खुर्शीद ने कहा कि अभी तक इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इसे अंतरिम समझौता बताया जा रहा है। उनके अनुसार, मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार का दावा सही है, तो पारदर्शिता दिखाते हुए दस्तावेज सार्वजनिक करने में हिचक क्यों है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक जो जानकारी सामने आई है, वह मुख्य रूप से विदेशी स्रोतों, विशेषकर व्हाइट हाउस के सोशल मीडिया पोस्ट से मिली है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
मजदूर और किसान हितों को लेकर कांग्रेस की चिंता
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित ट्रेड डील में मजदूरों और किसानों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। पार्टी का कहना है कि देशभर में मजदूर संगठनों की हड़ताल और किसानों की आशंकाएं इसी चिंता को दर्शाती हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या सरकार मजदूरों और किसानों की बात सुनेगी या किसी बाहरी दबाव में फैसले ले रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा था कि देशभर में लाखों लोग अपने अधिकारों की आवाज उठा रहे हैं और उन्हें डर है कि लेबर कानूनों के प्रावधान उनके अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं।
सलमान खुर्शीद ने दोहराया कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल पारदर्शिता की मांग करना है। उनका कहना है कि यदि सरकार को भरोसा है कि डील देशहित में है, तो उसके बिंदु स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि भ्रम दूर हो सके। ट्रेड डील को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे किसानों, मजदूरों और उद्योग जगत से जुड़ा है। विपक्ष जहां पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे देश की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

