द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केरल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के एक बयान ने कांग्रेस खेमे में हलचल पैदा कर दी है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान अय्यर ने दावा किया कि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनरई विजयन एक बार फिर राज्य की सत्ता संभाल सकते हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस और वाम दलों के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है।
‘विजन 2031: विकास और लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने किया। अपने संबोधन में अय्यर ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कानून में आवश्यक संशोधन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि केरल ने स्थानीय स्वशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है और इस मॉडल को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।
पंचायती राज पर जोर, कांग्रेस सहयोगियों की अनुपस्थिति पर अफसोस
मणिशंकर अय्यर, जो यूपीए सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं, ने कहा कि देश में पंचायती राज के समर्थक कम होते जा रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम में अपने पार्टी सहयोगियों की अनुपस्थिति पर खेद जताते हुए कहा कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजयन से आग्रह किया कि वे स्थानीय निकायों को और सशक्त बनाने की पहल करें।
अय्यर ने महात्मा गांधी के उस विचार को भी याद किया, जिसमें गांवों को लोकतंत्र की आधारशिला माना गया था। उनके अनुसार, गांधी का सपना था कि सबसे गरीब व्यक्ति भी राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी महसूस करे। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक स्तर पर पंचायती राज के मामले में केरल देश में अग्रणी है, हालांकि कानूनी ढांचे में सुधार की गुंजाइश अभी भी है।
मुख्यमंत्री विजयन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने अय्यर के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब सत्ता का विकेंद्रीकरण हो और स्थानीय निकायों को पर्याप्त अधिकार मिले। विजयन ने यह भी कहा कि राज्य सरकार स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अय्यर का बयान चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे सकता है। जहां कांग्रेस इस बयान को लेकर असहज नजर आ रही है, वहीं वाम मोर्चा इसे अपनी नीतियों की मान्यता के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।

