द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इन अधिकारियों पर ड्यूटी में लापरवाही और एसआईआर (Special Intensive Revision) से जुड़े मामलों में कानूनी शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए यह कदम उठाया है।
चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को कहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
मुख्य सचिव को पत्र, तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश
रविवार रात भेजे गए पत्र में आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को बिना किसी देरी के निलंबित किया जाए और कैडर नियंत्रक प्राधिकरण उनके खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ करे। साथ ही आयोग को कार्रवाई की प्रगति से अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निलंबित अधिकारियों में तीन मुर्शिदाबाद जिले से, दो दक्षिण 24 परगना से तथा एक-एक पश्चिम मेदिनीपुर और जलपाईगुड़ी जिले से हैं। मुर्शिदाबाद में कृषि विभाग के सहायक निदेशक और 56-समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ डॉ. सेफौर रहमान, फरक्का के राजस्व अधिकारी और 55-फरक्का विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ नीतीश दास तथा सुती ब्लॉक के एडीए और 57-सुती विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ एस.के. मुर्शिद आलम शामिल हैं।
इसके अलावा मयनागुड़ी विकास खंड की महिला विकास अधिकारी एवं 16-मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र की एईआरओ दलिया रे चौधरी को भी निलंबित किया गया है। दक्षिण 24 परगना जिले में 139-कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ सत्यजीत दास और एफईओ जॉयदीप कुंडू तथा पश्चिम मेदिनीपुर के 229-डेबरा विधानसभा क्षेत्र के संयुक्त बीडीओ एवं एईआरओ देबाशीष बिस्वास के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
चुनाव आयोग के इस फैसले को राज्य में चुनावी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आयोग की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश देती है। आने वाले समय में इस मामले की जांच और विभागीय कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

