द लोकतंत्र/ लखनऊ : लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा (MGNREGA) समेत विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के मद्देनजर प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन ग्रामीण रोजगार, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने राजधानी की सियासत को गर्मा दिया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
मनरेगा और ग्रामीण रोजगार पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख सहारा रहा है। उनका आरोप था कि योजना के स्वरूप में बदलाव और इसके नाम से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को हटाना सरकार की मंशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) देशभर में इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन चला रही है और उसी कड़ी में लखनऊ में विधानसभा घेराव का आह्वान किया गया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रशासनिक सख्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि बैरिकेडिंग और पुलिस बल का इस्तेमाल लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में संवाद और भरोसे की आवश्यकता होती है, न कि भय और दबाव की राजनीति की। उन्होंने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया और कहा कि कांग्रेस इन सवालों पर पीछे नहीं हटेगी।
प्रदेश प्रभारी बोले- संघर्ष जारी रहेगा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने प्रदर्शन में जुटे कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि मनरेगा से जुड़े बदलावों को लेकर जनता में असंतोष है। उन्होंने कहा कि मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा के लिए पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, लखनऊ में हुआ यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में नए टकराव का संकेत देता है। मनरेगा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकार जैसे मुद्दों पर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की रणनीति स्पष्ट कर दी है, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने दायित्व पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

