द लोकतंत्र/ पटना : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटें खाली होने जा रही हैं और 16 मार्च 2026 को इन पर मतदान होना है। अधिसूचना जारी होते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका मिलेगा या नए चेहरों पर दांव खेला जाएगा? राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।
विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद से ही यह लगभग तय माना जा रहा था कि खाली हो रही सीटों में से दो पर जनता दल यूनाइटेड और दो पर भारतीय जनता पार्टी अपने उम्मीदवार भेजेंगी। वहीं पांचवीं सीट को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच खींचतान की स्थिति बनती दिख रही है। इस एक सीट पर कम से कम तीन सहयोगी दल अपनी मजबूत दावेदारी जता रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह सीट बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि एनडीए के अंदर संतुलन बनाए रखना शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकता होगी।
एलजेपी, HAM और कुशवाहा की पार्टी में टक्कर, किसे मिलेगा मौका?
एनडीए की सहयोगी पार्टियों में सबसे पहले चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) का नाम सामने आ रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर उनकी नाराजगी चर्चा में रही थी, लेकिन अंततः समझौते के बाद उनकी पार्टी 29 सीटों पर लड़ी और 19 सीटों पर जीत दर्ज की। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि उन्हें राज्यसभा की एक सीट का आश्वासन दिया गया था।
यदि एलजेपी को यह सीट मिलती है तो बड़ा सवाल होगा कि पार्टी किसे उम्मीदवार बनाएगी। सूत्रों के मुताबिक, चर्चा है कि चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेज सकते हैं। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और एनडीए के शीर्ष स्तर पर ही होगा।
दूसरी ओर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी भी दावेदारी में पीछे नहीं है। कुशवाहा पहले भी बीजेपी कोटे से राज्यसभा जा चुके हैं, इसलिए उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2025 के चुनाव के बाद यह चर्चा भी उठी थी कि उन्हें राज्यसभा और विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
इसके अलावा जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा भी अपनी दावेदारी जता सकती है। विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर मांझी ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे, ऐसे में उन्हें संतुष्ट रखना भी एनडीए के लिए जरूरी माना जा रहा है। कुल मिलाकर, बिहार की पांच राज्यसभा सीटों में चार पर तस्वीर लगभग साफ है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर एनडीए के भीतर रणनीतिक मंथन जारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि गठबंधन संतुलन साधने के लिए किस सहयोगी को राज्यसभा भेजा जाता है और क्या मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका मिलता है।

