द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के दौरान भारत की ‘MANAV Vision’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत समर्थन मिला। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने प्रेस वार्ता में बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की मानव-केंद्रित नीति को वैश्विक उद्योग जगत और नीति निर्माताओं ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि भारत पांच स्तरों पर AI विकास की रणनीति पर काम कर रहा है और स्वदेशी ‘सॉवरेन बुके ऑफ मॉडल्स’ तैयार कर रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं द्वारा विकसित उच्च गुणवत्ता वाले AI मॉडल्स ने वैश्विक कंपनियों को प्रभावित किया है। मंत्री के अनुसार, उनके विभिन्न द्विपक्षीय संवादों में उद्योग नेताओं ने भारतीय प्रतिभा और नवाचार क्षमता की खुलकर सराहना की।
5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने दर्ज की उपस्थिति
समिट का आयोजन Bharat Mandapam में हुआ, जहां देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों ने भाग लिया। मंत्री ने बताया कि इस आयोजन में 5 लाख से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही, जबकि 2.5 लाख छात्रों की भागीदारी ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत की नई पीढ़ी AI तकनीक को अवसर के रूप में देख रही है और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इसमें योगदान देना चाहती है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि समिट के दौरान भारत को कई निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो देश के बढ़ते AI इकोसिस्टम का प्रमाण हैं।
क्या है ‘MANAV Vision’? मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस का भारतीय मॉडल
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने समिट में ‘MANAV Vision’ पेश करते हुए स्पष्ट किया कि AI का विकास मानव मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि ‘MANAV’ में ‘M’ नैतिक और एथिकल सिस्टम, ‘A’ जवाबदेह शासन व्यवस्था, ‘N’ राष्ट्रीय संप्रभुता, ‘A’ सर्वसुलभ और समावेशी पहुंच तथा ‘V’ वैध और सत्यापन योग्य तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि डेटा का स्वामित्व उसके वास्तविक मालिक के पास होना चाहिए और AI किसी एकाधिकार का माध्यम नहीं बल्कि विकास का गुणक बने। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और मजबूत नियामकीय ढांचे की आवश्यकता पर भी बल दिया।
यह समिट वैश्विक दक्षिण में आयोजित पहला बड़ा AI सम्मेलन है, जो ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और ‘AI for Humanity’ के सिद्धांतों को आगे बढ़ाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह पहल न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है, बल्कि जिम्मेदार और समावेशी AI गवर्नेंस के लिए वैश्विक मानक तय करने की क्षमता भी रखती है। भारत अब AI के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नीतिगत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।

