द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका की सर्वोच्च अदालत (US Supreme Court) ने राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापक टैरिफ नीति को बड़ा झटका देते हुए अधिकांश आयात शुल्क उपायों को अवैध ठहरा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने कहा कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन को हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट से कई अंतरिम राहतें मिली थीं। अदालत ने पहले कुछ नीतिगत मामलों में प्रशासन के पक्ष में निर्णय दिए थे, लेकिन इस बार अदालत का रुख अलग दिखाई दिया। माना जा रहा है कि यह निर्णय अमेरिकी व्यापार नीति, वैश्विक बाजार, महंगाई दर और घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर व्यापक प्रभाव डालेगा।
विवादित टैरिफ के तहत ट्रिलियन डॉलर के व्यापार पर शुल्क लगाया गया था और 14 दिसंबर तक अमेरिकी सरकार ने करीब 134 अरब डॉलर की वसूली की थी। टैक्स फाउंडेशन के अनुमान के अनुसार, इस व्यापारिक टकराव का भार 2025 में प्रत्येक अमेरिकी परिवार पर औसतन 1,100 डॉलर तक पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से न केवल सरकारी राजस्व पर असर पड़ेगा, बल्कि कंपनियों की लागत और आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: टैरिफ में राहत और नई संभावनाएं
इस निर्णय से कुछ दिन पहले ही अमेरिका और भारत ने एक अंतरिम व्यापार ढांचे पर सहमति जताई थी। यह ढांचा व्यापक U.S.-India Bilateral Trade Agreement (BTA) वार्ता का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच हुई थी। संयुक्त बयान के अनुसार, यह अंतरिम समझौता दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार को बढ़ावा देगा।
समझौते के तहत भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं जैसे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स पर शुल्क कम या समाप्त करेगा। वहीं अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 के तहत भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लागू करेगा, जिसमें टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर और कुछ मशीनरी उत्पाद शामिल हैं।
साथ ही, यदि अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो 5 सितंबर 2025 के आदेश 14346 के तहत कुछ उत्पादों जैसे जेनेरिक दवाइयां, रत्न और हीरे, तथा विमान के पुर्जों पर टैरिफ हटाने की भी संभावना है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका पहले भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका था, जिसमें रूस से तेल आयात से जुड़े उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था। विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति से वैश्विक व्यापार संतुलन में नए समीकरण बन सकते हैं।

