द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका ने तत्काल प्रभाव से 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे भारत समेत सभी प्रमुख व्यापार साझेदार प्रभावित होंगे। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह 10% शुल्क तब तक लागू रहेगा, जब तक किसी अन्य कानूनी प्राधिकरण के तहत नई व्यवस्था लागू नहीं की जाती। अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या भारत को भी इस नई दर के तहत शुल्क देना होगा और क्या यह 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ की जगह लेगा, तो उन्होंने ‘हाँ’ में जवाब दिया।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापक टैरिफ नीति को झटका दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि IEEPA के तहत राष्ट्रपति को इतने व्यापक आयात शुल्क लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं है और यह शक्ति अमेरिकी संविधान के अनुसार कांग्रेस के पास है। चीफ जस्टिस John Roberts के साथ नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और तीन अन्य न्यायाधीशों ने बहुमत का समर्थन किया, जबकि सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानॉ ने असहमति जताई।
अदालत के फैसले के बाद अनुमान है कि अमेरिकी सरकार को 130 से 175 अरब डॉलर तक के संभावित रिफंड दावों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि अरबों डॉलर के रेसिप्रोकल टैरिफ अमान्य घोषित हो चुके हैं।
सेक्शन 122 के तहत नया कदम, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर असर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करने की घोषणा की। यह प्रावधान सरकार को 150 दिनों तक अधिकतम 15% अस्थायी शुल्क लगाने की अनुमति देता है, खासकर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से। ट्रंप ने कहा कि सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) और सेक्शन 301 (अनुचित व्यापार प्रथाएं) के तहत पहले से लागू टैरिफ प्रभावी रहेंगे।
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘लुडिक्रस’ और ‘भयानक’ करार देते हुए कहा कि अदालत ने उनकी आर्थिक शक्तियों को सीमित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय विदेशी हितों को फायदा पहुंचा सकता है।
भारत के संदर्भ में स्थिति जटिल हो सकती है। पहले पारस्परिक टैरिफ को 18% तक समायोजित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब 10% ग्लोबल टैरिफ अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है। इससे भारतीय निर्यात, विशेषकर स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटो पार्ट्स और टेक्सटाइल सेक्टर पर असर पड़ने की आशंका है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

