द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पूर्व थलसेनाध्यक्ष General Manoj Mukund Naravane की प्रस्तावित पुस्तक को लेकर उठे विवाद के बीच रक्षा मंत्री Rajnath Singh का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व सेना प्रमुखों या वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर किताब लिखने की कोई रोक नहीं लगाई गई है। रक्षा मंत्री ने उन खबरों को भी गलत बताया, जिनमें दावा किया गया था कि सेना से जुड़े अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद 20 वर्षों तक कोई पुस्तक लिखने की अनुमति नहीं होगी।
हाल के बजट सत्र में इस मुद्दे ने संसद में भी राजनीतिक रंग ले लिया। विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने सरकार से सवाल किया कि आखिर जनरल नरवणे की पुस्तक के प्रकाशन को लेकर क्या स्थिति है। इस पर सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। जनरल नरवणे मार्च 2020 से अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख रहे। इसी दौरान 15-16 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। अक्टूबर 2023 में उन्होंने न्यूज एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ लिखी है, जिसमें कई महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र किया गया है।
गलवान से डिसइंगेजमेंट तक का जिक्र, प्रकाशन पर मंत्रालय की आपत्ति
जनरल नरवणे की पुस्तक में गलवान घाटी की झड़प, उसके बाद सीमा पर तनाव, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर हुई वार्ताओं तथा डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया का विस्तृत उल्लेख बताया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पुस्तक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval के साथ हुई चर्चाओं का भी विवरण शामिल है। इसके अलावा कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की बैठकों का उल्लेख भी कथित रूप से पुस्तक में किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सीधे जनरल नरवणे के बजाय प्रकाशन संस्था से पुस्तक का ड्राफ्ट मांगा है। बताया जा रहा है कि अप्रैल 2024 में प्रस्तावित प्रकाशन को अब तक अनुमति नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और आर्मी एक्ट के तहत संवेदनशील सूचनाओं के सार्वजनिक होने की आशंका को देखते हुए पुस्तक पर रोक लगाई गई है।
रक्षा मंत्री के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार का उद्देश्य लेखन पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा सुनिश्चित करना है। अब देखना होगा कि जांच और समीक्षा प्रक्रिया के बाद पुस्तक को प्रकाशन की मंजूरी मिलती है या नहीं।

