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बिहार शराबबंदी पर सियासी घमासान: बीजेपी विधायक के बयान से एनडीए में हलचल, JDU ने कहा- कानून में ढील संभव नहीं

Political turmoil over Bihar liquor ban: BJP MLA's statement stirs NDA, JDU says no relaxation in law possible

द लोकतंत्र/ पटना : बिहार में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एनडीए गठबंधन के भीतर ही अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। हाल ही में बीजेपी विधायक Vinay Bihari ने बयान दिया कि यदि शराबबंदी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही है, तो इसकी समीक्षा कर पहले जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

इस पर मुख्यमंत्री Nitish Kumar की पार्टी जेडीयू ने स्पष्ट रुख अपनाया है। जेडीयू प्रवक्ता Abhishek Jha ने कहा कि शराबबंदी महात्मा गांधी के सिद्धांतों के अनुरूप लिया गया ऐतिहासिक निर्णय है और इसमें किसी प्रकार की ढील या समाप्ति की बात ‘पूरी तरह असंभव’ है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कानून की समीक्षा की जाती है, लेकिन समीक्षा के नाम पर इसे कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अभिषेक झा ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी नेता का व्यक्तिगत बयान पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं होता। जेडीयू के अनुसार, शराबबंदी सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है, जिसे वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता।

बीजेपी का संतुलित रुख: कानून रहेगा, क्रियान्वयन और सख्त होगा

बीजेपी की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आई है। बिहार बीजेपी प्रवक्ता Prabhakar Mishra ने कहा कि विनय बिहारी ने जमीनी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन पार्टी शराबबंदी के निर्णय के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज के व्यापक हित में लिया गया था और इससे लाखों परिवारों को लाभ हुआ है। प्रभाकर मिश्रा ने जोर देते हुए कहा कि शराबबंदी कानून लागू रहेगा और इसे और प्रभावी बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जहां भी अवैध शराब कारोबार की शिकायत मिलती है, वहां कड़ी कार्रवाई की जा रही है और आगे भी सख्ती बढ़ाई जाएगी।

बीजेपी का मानना है कि सुधार की गुंजाइश हर नीति में होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाए गए कदमों को पीछे हटा दिया जाए। पार्टी ने दोहराया कि उनका लक्ष्य ‘शराब मुक्त, सुरक्षित और समृद्ध बिहार’ बनाना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शराबबंदी बिहार की राजनीति का संवेदनशील मुद्दा है। यह महिलाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच खासा प्रभाव रखता है। ऐसे में एनडीए के भीतर बयानबाजी भले तेज हो, लेकिन फिलहाल सरकार का रुख कानून को बनाए रखने और उसे सख्ती से लागू करने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।

यह भी पढ़ें : Rohit Pawar ने VSR की भूमिका पर उठाए सवाल, पीएम मोदी और अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग

Team The Loktantra

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