द लोकतंत्र/ लखनऊ डेस्क : प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस सोमवार को उनके आवास पर पहुंची। पुलिस की कार्रवाई के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह किसी भी प्रकार से विरोध नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन ‘अदालतों’ जनता, अपनी अंतरात्मा और ईश्वर पर भरोसा है और तीनों से उन्हें ‘क्लीन चिट’ मिली है।
यह कार्रवाई उस एफआईआर के बाद हुई है जो झूंसी थाने में विशेष POCSO अदालत के निर्देश पर दर्ज की गई थी। पुलिस के मुताबिक, शनिवार देर रात करीब 11:30 बजे न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मामला पंजीकृत किया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि न्यायिक निर्देश के अनुरूप आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस, क्या कहा अदालत ने
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3) तथा Protection of Children from Sexual Offences Act की धाराएं 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 के तहत दर्ज की गई है। आरोप जनवरी 13, 2025 से फरवरी 15, 2026 के बीच की घटनाओं से जुड़े बताए गए हैं, जिनमें नाबालिगों से संबंधित गंभीर आरोप शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर सुनवाई के बाद आदेश पारित किया। अदालत ने शिकायत, कथित पीड़ितों के बयान, स्वतंत्र गवाहों की गवाही और प्रयागराज के सहायक पुलिस आयुक्त की जांच रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथमदृष्टया संज्ञेय और दंडनीय अपराध का संकेत देती है। इसके आधार पर झूंसी थाने के एसएचओ को बिना विलंब एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया के तहत साक्ष्य संकलन, संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और आवश्यक विधिक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और जांच में सहयोग करेंगे। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

