द लोकतंत्र : बॉलीवुड में काम के घंटों और महिला कलाकारों की जरूरतों को लेकर एक नई जंग छिड़ गई है। हाल ही में एक्टर कुणाल खेमू ने अपनी पत्नी सोहा अली खान के पॉडकास्ट पर कुछ ऐसा कह दिया, जिससे इंटरनेट पर उन्हें ‘महिला विरोधी’ और ‘पिछड़ी सोच वाला’ बताया जा रहा है। विवाद की जड़ है दीपिका पादुकोण की वह कथित मांग, जिसमें उन्होंने फिल्म सेट पर 8 घंटे की शिफ्ट की बात कही थी।
आज 13 मार्च 2026 की इस रिपोर्ट में जानिए कि कैसे एक पॉडकास्ट की बातचीत अब एक बड़े सामाजिक मुद्दे में बदल गई है।
क्या कहा कुणाल खेमू ने?
सोहा के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान कुणाल खेमू ने सुझाव दिया कि महिलाओं को अपनी प्रेग्नेंसी को बेहतर ढंग से “प्लान” करना चाहिए। उन्होंने दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट की मांग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति ज्यादा पैसे लेते हुए कम घंटे काम करने की उम्मीद नहीं कर सकता। कुणाल के मुताबिक, ऐसे फैसले केवल वही ले सकता है जिसने प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाया हो।
सोशल मीडिया पर फूटा यूजर्स का गुस्सा
कुणाल का यह बयान वायरल होते ही रेडिट और एक्स (Twitter) पर लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। यूजर्स का कहना है कि एक पिता और पति होने के बावजूद कुणाल यह नहीं समझ पा रहे कि प्रेग्नेंसी कोई ‘ग्रुप प्रोजेक्ट’ नहीं है जिसे कैलेंडर पर फिक्स किया जा सके।
- यूजर्स के कमेंट्स: एक यूजर ने लिखा, “यह उस तरह के मैनेजर हैं जो प्रेग्नेंट कर्मचारी को सबसे पहले नौकरी से निकाल देते हैं।”
- मेल एक्टर्स से तुलना: लोगों ने अजय देवगन (संडे नो वर्क) और अक्षय कुमार (8 घंटे की शिफ्ट) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मर्द ऐसी शर्तें रखते हैं तो उसे ‘प्रोफेशनलिज्म’ कहा जाता है, लेकिन एक महिला अपनी सेहत के लिए यह मांग करे तो उसे ‘प्लान’ करने की सलाह दी जाती है।
दीपिका पादुकोण का नजरिया: काम नहीं, इंसानियत जरूरी
दूसरी ओर, दीपिका पादुकोण लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री में स्ट्रक्चर्ड वर्क कल्चर की वकालत कर रही हैं। उनका तर्क है कि 8 घंटे का कार्यदिवस (Working Day) केवल प्रेग्नेंसी के लिए नहीं, बल्कि हर कर्मचारी की मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है।
दीपिका ने अपने इंटरव्यू में कहा था, “हमने जरूरत से ज्यादा काम करने (Overworking) को गौरव की बात मान लिया है। मानव शरीर और दिमाग के लिए दिन में 8 घंटे का काम काफी है। जब आप स्वस्थ और खुश होंगे, तभी अपना बेस्ट दे पाएंगे।” दीपिका के ऑफिस में भी सोमवार से शुक्रवार, 8 घंटे का नियम लागू है और वहां बेहतर मैटरनिटी पॉलिसी भी है।
पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल
फैंस का मानना है कि कुणाल खेमू का नजरिया बहुत संकीर्ण है। एक महिला जो मां बनने वाली है, वह केवल अपनी शर्तें सामने रख रही थी। जब प्रोडक्शन के साथ बात नहीं बनी, तो वह शालीनता से फिल्म से अलग हो गईं। ऐसे में उन्हें प्रेग्नेंसी ‘प्लान’ करने की नसीहत देना उनकी मेहनत और शारीरिक चुनौतियों का अनादर करने जैसा है।
यह बहस केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस वर्कप्लेस की कहानी है जहाँ महिलाओं की शारीरिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को ‘रुकावट’ के रूप में देखा जाता है। दीपिका की मांग एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, जबकि कुणाल का बयान पुरानी सोच की याद दिलाता है।

