द लोकतंत्र: हम सभी के मन में एटीएम मशीन का इस्तेमाल करते समय एक डर जरूर होता है— “कहीं पैसे अटक न जाएं?” नागपुर के एक शख्स के साथ साल 2018 में ठीक ऐसा ही हुआ। मशीन से कैश नहीं निकला, लेकिन मोबाइल पर पैसे कटने का मैसेज आ गया। ज्यादातर लोग ऐसी स्थिति में बैंक के चक्कर काटकर हार मान लेते हैं, लेकिन इस ग्राहक ने हार नहीं मानी।
आज 15 मार्च 2026 की इस रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे एक आम आदमी ने सिस्टम से लड़कर अपनी जीत हासिल की और बैंक को सबक सिखाया।
₹5,000 के लिए 8 साल की लंबी जंग
पूरा मामला अगस्त 2018 का है। शिकायतकर्ता ने नागपुर में एक्सिस बैंक के एक एटीएम से ₹5,000 निकालने की कोशिश की। रसीद निकल गई, खाते से पैसे कटने का मैसेज भी आ गया, लेकिन कैश डिस्पेंसर से एक भी नोट बाहर नहीं आया।
ग्राहक ने तुरंत बैंक में शिकायत की, लेकिन बैंक ने उसे अनसुना कर दिया। इसके बाद बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) के पास भी गुहार लगाई गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अंत में थक-हारकर ग्राहक ने कानूनी रास्ता चुना।
उपभोक्ता आयोग में बैंक की पोल खुली
जब बैंक और लोकपाल ने साथ नहीं दिया, तो मामला नागपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग पहुँचा। आयोग के अध्यक्ष सतीश सप्रे और सदस्य मिलिंद केदार की बेंच ने इस पर सुनवाई की।
हैरानी की बात यह रही कि आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने के बाद भी बैंक का कोई अधिकारी अपना पक्ष रखने नहीं आया। बैंक की इस चुप्पी को आयोग ने लापरवाही का बड़ा सबूत माना और एकतरफा सुनवाई शुरू की।
न सीसीटीवी देखा, न ही कोई जांच की
आयोग ने पाया कि बैंक ने इस मामले में घोर लापरवाही बरती है। ट्रांजेक्शन फेल होने के बावजूद:
- बैंक ने एटीएम के सीसीटीवी फुटेज की जांच नहीं की।
- मशीन में मौजूद कैश के मिलान (Cash Reconciliation) का कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया।
- ग्राहक की बार-बार की गई शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
आयोग ने इसे ‘सेवा में भारी कमी’ माना और कहा कि यह बैंक की जिम्मेदारी है कि वह तुरंत जांच कर ग्राहक को उसका पैसा लौटाए।
बैंक को मिला भारी दंड: चुकाना होगा दोगुना हर्जाना
आठ साल के मानसिक और शारीरिक शोषण को देखते हुए उपभोक्ता फोरम ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। आयोग ने एक्सिस बैंक को निर्देश दिए कि:
- ग्राहक के अटके हुए ₹5,000 तुरंत वापस किए जाएं।
- मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के हर्जाने के तौर पर ₹10,000 का अतिरिक्त भुगतान किया जाए।
यह मामला उन लाखों बैंक ग्राहकों के लिए एक मिसाल है जो तकनीकी खराबी की वजह से अपना पैसा खो देते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो याद रखें कि कानून आपके साथ है। बस जरूरत है धैर्य और सही कदम उठाने की।

