द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Pakistan की राजधानी Islamabad में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि Iran दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने पर विचार कर रहा है और प्रतिनिधिमंडल भेजने की इच्छा भी जताई गई है। हालांकि अभी तक न तो ईरान और न ही United States की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। इसे लेकर ‘सावधानी भरा आशावाद’ जताया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान ने यात्रा, समय या संभावित एजेंडे को लेकर कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की है। साथ ही मीडिया से भी अटकलों से बचने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता होती है, तो मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति हो सकती है। खासतौर पर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा पर इस टकराव का असर देखा जा रहा है।
संशय अब भी बरकरार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और सीजफायर टाइमलाइन बनी बड़ी चुनौती
हालांकि शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेतों के बीच अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Ministry of Foreign Affairs of Iran के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने हालिया बयान में अगले दौर की बातचीत को लेकर किसी ठोस योजना से इनकार किया है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर भी इस प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
इस बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध भी बातचीत के रास्ते में बड़ी बाधा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा, जबकि अमेरिकी मांगें भी तनाव को बढ़ाने वाली मानी जा रही हैं। इसी बीच अमेरिका के सैन्य विमान पाकिस्तान पहुंचने की खबरों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है।
21 अप्रैल को दोनों देशों के बीच सीजफायर की समयसीमा समाप्त होने जा रही है, ऐसे में आने वाले घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस्लामाबाद वार्ता तनाव कम करने की दिशा में निर्णायक साबित होगी या कूटनीतिक असमंजस और गहराएगा।

