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Kapil Sibal on Democracy: ‘हार-जीत चलती रहती है, लेकिन संविधान और लोकतंत्र की हार नहीं होनी चाहिए’

Kapil Sibal on Democracy: ‘Wins and losses come and go, but the Constitution and democracy must not be defeated.’

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : देश के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद Kapil Sibal ने हालिया चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकतंत्र और संविधान की मजबूती पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को किसी भी स्थिति में नुकसान न पहुंचे।

कपिल सिब्बल ने कहा, ‘जो जीता वही सिकंदर’ कहना आसान है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि जीत कैसे हासिल की गई, इस पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतंत्र की नींव होती है, जिसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक जीत के पीछे अपनाए गए तरीकों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल, ‘बदले की राजनीति’ का आरोप

सिब्बल ने नरेंद्र मोदी के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की जीत के बाद “बदले नहीं, बदलाव की राजनीति” की बात कही थी। इस पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार के कदमों को देखकर यह पूछना जरूरी है कि वास्तव में यह बदलाव की राजनीति थी या बदले की।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में बहुमत वाली सरकारों को तोड़कर सत्ता परिवर्तन कराया गया, जिसे वे ‘बदलाव नहीं, बल्कि बदले की राजनीति’ मानते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

सिब्बल के अनुसार, सत्ता परिवर्तन का मतलब केवल सरकार बदलना नहीं, बल्कि देश में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

ममता बनर्जी के बयान पर टिप्पणी से किया इनकार

जब ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार वाले बयान पर उनसे सवाल किया गया, तो कपिल सिब्बल ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के बयान के पीछे क्या सोच है, इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि ममता बनर्जी ने अपना बयान वापस लिया है, इसलिए इस विषय पर स्पष्ट जानकारी के लिए सीधे उनसे ही सवाल किया जाना चाहिए।

कानूनी विकल्पों के सवाल पर भी सिब्बल ने जवाब देने से परहेज किया और इसे ‘काल्पनिक स्थिति’ बताते हुए टिप्पणी करने से मना कर दिया। कपिल सिब्बल का यह बयान भारतीय राजनीति में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को और तेज करता है। उन्होंने साफ किया कि चुनावी जीत-हार से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि लोकतंत्र की नींव मजबूत बनी रहे और संस्थाओं की विश्वसनीयता कायम रहे।

यह भी पढ़ें – Assembly Elections 2026: ध्रुवीकरण की राजनीति में कांग्रेस को अल्पसंख्यक समर्थन, लेकिन सामाजिक संतुलन की चुनौती

Team The Loktantra

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