द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : Tamil Nadu में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक सस्पेंस अब और गहरा गया है। अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंचने के बाद भी बहुमत के आंकड़े से जूझती नजर आ रही है। शुक्रवार देर रात हुए घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया, जब विजय के शपथ ग्रहण की चर्चाओं के बीच सहयोगी दलों के रुख बदलने लगे।
दरअसल, शनिवार 9 मई 2026 को विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की अटकलें तेज थीं। बताया जा रहा था कि टीवीके को कई दलों का समर्थन मिल चुका है और गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक पहुंच गया है। हालांकि अंतिम समय में समर्थन को लेकर पैदा हुए असमंजस ने पूरी तस्वीर बदल दी।
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने अभी तक शपथ ग्रहण की औपचारिक घोषणा नहीं की है। राजभवन की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि जब तक सभी सहयोगी दलों के आधिकारिक समर्थन पत्र नहीं मिल जाते, तब तक सरकार गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
VCK और IUML के रुख ने बढ़ाया सस्पेंस
तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) और Indian Union Muslim League (IUML) के समर्थन को लेकर विरोधाभासी खबरें सामने आने लगीं।
पहले यह दावा किया गया कि VCK और IUML दोनों ने टीवीके को समर्थन दे दिया है, जिससे विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन का आंकड़ा 121 तक पहुंच गया। इसी के आधार पर शपथ ग्रहण की तैयारियां भी तेज हो गई थीं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद IUML ने टीवीके को समर्थन देने की खबरों से इनकार कर दिया और साफ कहा कि पार्टी अभी भी Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) गठबंधन के साथ है।
इसी बीच खबर आई कि कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों को चेन्नई से बेंगलुरु शिफ्ट कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे संभावित जोड़तोड़ और विधायकों की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि विजय ने तीसरी बार राजभवन जाकर राज्यपाल को 116 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है। हालांकि बहुमत के लिए अभी भी दो विधायकों की जरूरत बनी हुई है।
जाली समर्थन पत्र और खरीद-फरोख्त के आरोपों से गरमाई राजनीति
राजनीतिक ड्रामे के बीच Amma Makkal Munnetra Kazhagam (AMMK) के महासचिव T. T. V. Dhinakaran के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। दिनाकरन ने दावा किया कि उन्होंने Edappadi K. Palaniswami के समर्थन में पत्र भेजा था, लेकिन टीवी चैनलों पर उनकी पार्टी का समर्थन विजय के पक्ष में दिखाया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए जाली पत्र और विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताई है।
उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले की जांच की मांग भी की है। दिनाकरन का कहना है कि अगर किसी विधायक के हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है।
तमिलनाडु में फिलहाल राजनीतिक स्थिति बेहद अनिश्चित बनी हुई है। एक ओर विजय सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगे हैं, तो दूसरी ओर डीएमके और एआईएडीएमके भी राजनीतिक समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले 24 घंटे राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

