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NEET विवाद के बीच NTA में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, केंद्र सरकार ने की नई नियुक्तियां

Major Administrative Reshuffle at NTA Amid NEET Controversy; Central Government Makes New Appointments

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में चल रहे विवादों और NEET-UG पेपर लीक मामले के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने NTA में दो संयुक्त सचिव और दो संयुक्त निदेशक की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अनुजा बापट और रुचिता विज को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगड़िया को संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात किया गया है।

इन नियुक्तियों को NTA की प्रशासनिक और संचालन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। ऐसे में सरकार अब एजेंसी की विश्वसनीयता बहाल करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

पांच साल के लिए नियुक्त होंगे अधिकारी

सरकारी आदेश के मुताबिक, भारतीय सांख्यिकी सेवा की 1998 बैच की अधिकारी अनुजा बापट और भारतीय राजस्व सेवा की 2004 बैच की अधिकारी रुचिता विज को पांच साल की अवधि के लिए NTA में संयुक्त सचिव बनाया गया है।

इन नियुक्तियों के लिए खाली पड़े डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के पदों को अस्थायी रूप से अपग्रेड किया गया है। वहीं भारतीय राजस्व सेवा (इनकम टैक्स) के अधिकारी आकाश जैन और भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा के अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगड़िया को संयुक्त निदेशक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि परीक्षा एजेंसी की पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत भी है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्वीकार किया था कि NTA में और सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि “सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और हमारी जिम्मेदारी है कि NTA बिना किसी गलती के काम करे।”

NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI जांच तेज

गौरतलब है कि इस साल 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। लेकिन पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद CBI ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जो पेपर लीक नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

दिल्ली की एक अदालत ने मामले के कथित मास्टरमाइंड पी वी कुलकर्णी और आरोपी मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की CBI हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर लीक नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सरकार के लिए अब पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

यह भी पढ़ें – NEET विवाद पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- ‘22 लाख छात्रों के साथ हुआ धोखा’

Team The Loktantra

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