द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने गठबंधन की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी चुनावों में सहयोगी दलों के साथ गठबंधन जारी रहेगा और इसका आधार सीटों का बंटवारा नहीं बल्कि चुनाव में जीत सुनिश्चित करना होगा।
लखनऊ में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में वह और कांग्रेस नेता Rahul Gandhi एक साथ चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे, तो उन्होंने गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
‘हमारे पास गठबंधन चलाने का अनुभव है’
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन की राजनीति को अच्छी तरह समझती है और उसके पास इसे सफलतापूर्वक चलाने का अनुभव है। उन्होंने कहा, हमने कई गठबंधन किए हैं। हमारे पास गठबंधन का अनुभव है। समाजवादी पार्टी ने हमेशा अपने सहयोगियों के लिए लाभ सुनिश्चित किया है। हमने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा गठबंधन भविष्य में भी जारी रहेगा और पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार करेगी।
‘सीटों का नहीं, जीत का होगा सवाल’
सपा प्रमुख ने साफ कहा कि भविष्य में गठबंधन की राजनीति सीटों की सौदेबाजी के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी। उन्होंने कहा, लोकसभा चुनाव के दौरान भी मैंने कहा था कि मुद्दा सीटों का नहीं है, मुद्दा जीत का है। यही फॉर्मूला आगे भी काम करेगा। अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी फोकस जीत सुनिश्चित करने पर रहेगा, न कि सिर्फ सीटों के बंटवारे पर।
INDIA गठबंधन को लेकर भी दिया जवाब
जब उनसे पूछा गया कि ‘INDIA’ गठबंधन कई राज्यों में एकजुटता बनाए रखने में संघर्ष करता दिखाई दिया है, तो उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जानती है कि गठबंधन को कैसे बनाए रखा जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता को लेकर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
यूपी चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। भाजपा जहां लगातार संगठन और सरकार के कामकाज के दम पर चुनावी तैयारी में जुटी है, वहीं विपक्षी दल भी सामाजिक समीकरण और गठबंधन की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए तालमेल को विपक्ष के लिए सकारात्मक माना गया था। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन किस रूप में सामने आता है और विपक्षी दल किस रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरते हैं।

