द लोकतंत्र/ अयोध्या : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित अनियमितता और चोरी के आरोपों के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए आठ लोगों को नामजद किया है। यह कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
Ram Mandir चढ़ावा मामला: SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR
इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। जांच टीम का नेतृत्व लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस मामले में “दूध का दूध और पानी का पानी” किया जाएगा।
एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार इनमें से कुछ लोग चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव गिनती टीम के प्रभारी बताए गए हैं, जबकि अन्य कर्मचारी नकदी गिनने की प्रक्रिया में सहयोग कर रहे थे। गौरतलब है कि एफआईआर में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के किसी सदस्य का नाम शामिल नहीं किया गया है। वहीं ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नाम भी एफआईआर में नहीं हैं।
Ram Mandir चढ़ावा मामला: CCTV फुटेज और कानूनी धाराओं के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर कुछ महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस के अनुसार इन्हीं शुरुआती तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत विवेचना के बाद ही सामने आएंगे।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 (कर्मचारी द्वारा संपत्ति की चोरी), धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 317 और उसकी उपधाराएं (चोरी की संपत्ति रखने, उसके लेन-देन और उसे छिपाने में सहायता), धारा 61 (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कथित आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।




