द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Global Religion Report 2026 दुनिया की धार्मिक आबादी को लेकर जारी एक नई वैश्विक रिपोर्ट में महत्वपूर्ण बदलावों की तस्वीर सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि, युवाओं की अधिक संख्या और अफ्रीका तथा एशिया में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण इस्लाम दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रमुख धर्म बनकर उभर रहा है। हालांकि, वृद्धि दर अधिक होने के बावजूद अनुमान है कि वर्ष 2075 तक ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बना रहेगा।
यह निष्कर्ष अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित गॉर्डन-कॉनवेल थियोलॉजिकल सेमिनरी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ग्लोबल क्रिश्चियनिटी द्वारा प्रकाशित Status of Global Christianity 2026 रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट तैयार करने में संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या आंकड़ों, वैश्विक जनगणना, विभिन्न शोध संस्थानों और धार्मिक संगठनों के अध्ययन का उपयोग किया गया है। इसमें वर्ष 2075 तक दुनिया की संभावित धार्मिक संरचना का अनुमान भी प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर धार्मिक जनसांख्यिकी का केंद्र लगातार बदल रहा है। जहां पहले यूरोप धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, वहीं अब अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका तेजी से नई धार्मिक आबादी के केंद्र बनते जा रहे हैं।
Global Religion Report 2026: मुस्लिम आबादी की तेज वृद्धि, लेकिन ईसाई धर्म रहेगा सबसे बड़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया में मुस्लिम आबादी दो अरब से अधिक हो चुकी है। यदि मौजूदा जनसंख्या वृद्धि का रुझान जारी रहता है, तो वर्ष 2075 तक यह संख्या लगभग 3.4 अरब तक पहुंच सकती है। अध्ययन में इस्लाम की औसत वार्षिक वृद्धि दर 1.57 प्रतिशत बताई गई है, जो ईसाई धर्म की 0.95 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से काफी अधिक है।
हालांकि, रिपोर्ट का अनुमान है कि ईसाई समुदाय की कुल आबादी भी लगातार बढ़ती रहेगी और 2075 तक दुनिया में लगभग 2.67 अरब ईसाई होंगे। इसी कारण ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बना रह सकता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ईसाई धर्म समाप्त नहीं हो रहा, बल्कि उसका भौगोलिक केंद्र बदल रहा है। यूरोप में चर्चों की संख्या और ईसाई आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका, एशिया के कई हिस्सों और लैटिन अमेरिका में ईसाई समुदाय तेजी से विस्तार कर रहा है।
Global Religion Report 2026: मध्य पूर्व में घट रही ईसाई आबादी, हिंदू आबादी का केंद्र भारत
अध्ययन के अनुसार, मध्य पूर्व जहां ईसाई धर्म की ऐतिहासिक शुरुआत हुई थी वहीं अब ईसाई आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1900 में मध्य पूर्व की कुल आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी लगभग 12.7 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 4.2 प्रतिशत रह गई है। इसके पीछे युद्ध, बड़े पैमाने पर पलायन, आर्थिक संकट, सामाजिक अस्थिरता, धार्मिक भेदभाव और उग्रवाद जैसे कारणों को प्रमुख वजह बताया गया है।
वहीं, हिंदू धर्म को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बना हुआ है। वैश्विक हिंदू आबादी का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहता है, जबकि करीब 95 प्रतिशत हिंदू भारत में निवास करते हैं। भारत, नेपाल और मॉरिशस ऐसे देश हैं, जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वैश्विक स्तर पर धार्मिक जनसांख्यिकी आने वाले दशकों में लगातार बदलती रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी, प्रवासन, जन्म दर और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां भविष्य में धार्मिक संतुलन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे अध्ययनों का उद्देश्य किसी धर्म की श्रेष्ठता बताना नहीं, बल्कि वैश्विक जनसांख्यिकीय रुझानों को समझना है।



