द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Bharat Bhushan Tiwari Encounter बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। अब प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायिक प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और समाज में संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि किसी भी मामले में निष्पक्ष न्याय होना चाहिए और यदि कहीं गलती हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भरत भूषण तिवारी के मामले ने उन्हें अंदर तक विचलित कर दिया है। उन्होंने समाज में बढ़ती संवेदनहीनता पर चिंता जताते हुए कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हर व्यक्ति कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखे तथा हर मामले की निष्पक्ष जांच हो।
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: ‘समाज में संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं’, बोले देवकीनंदन ठाकुर
अपने वीडियो संदेश में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भरत भूषण तिवारी एक युवा थे, जिन्होंने वर्षों पहले समाज सेवा का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो दूसरों के दुख-दर्द को समझें और उनके लिए काम करें।
उन्होंने कहा, आज मन बहुत अशांत है। ऐसा लगता है कि समाज में संवेदनाएं लगातार समाप्त होती जा रही हैं। हम सभी चाहते हैं कि समाज में अच्छे लोग आगे आएं और लोगों की सेवा करें, लेकिन जब ऐसे मामलों पर सवाल उठते हैं तो हर किसी को निष्पक्ष तरीके से जवाब मिलना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने शासन-प्रशासन से आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा तो समाज में असंतोष बढ़ेगा।
Bharat Bhushan Tiwari Encounter : ‘अगर गलती हुई है तो न्याय जरूर मिलना चाहिए’
कथावाचक ने अपने संदेश में गरीब और कमजोर वर्गों को न्याय मिलने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो उसका निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए।
देवकीनंदन ठाकुर ने भावुक शब्दों में कहा कि यदि किसी मां ने अपना बेटा खोया है तो उसकी पीड़ा को समझना भी समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच या कार्रवाई का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि सत्य तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी से गलती हुई है तो संबंधित लोगों को अपने अंतर्मन से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या किसी परिवार की खोई हुई खुशियां वापस लाई जा सकती हैं। उन्होंने समाज में करुणा, संवेदना और न्याय की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले ही राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। अब देवकीनंदन ठाकुर के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।




