द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नया निवेश मंच बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस मंच के जरिए व्यापार, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद जुटाने की योजना है। पुतिन ने यह प्रस्ताव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के उद्योग प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए दिया।
रूसी राष्ट्रपति के मुताबिक, प्रस्तावित निवेश मंच का आधार न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) हो सकता है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र से पूंजी जुटाकर ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। पुतिन ने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश भी इस पहल का समर्थन करेंगे।
NDB के आधार पर बनेगा निवेश मंच, इन परियोजनाओं पर रहेगा फोकस
पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों को बड़े स्तर पर वित्तपोषण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नया निवेश मंच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। रूस आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर साझेदार देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानव रहित परिवहन, वित्त, पर्यटन और उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य किसी देश को अलग-थलग करना नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया के साथ व्यापक सहयोग के लिए खुला है। उनके अनुसार, सरकारों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी के जरिए नवाचार और आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है।
वैश्विक GDP में ब्रिक्स की हिस्सेदारी का किया जिक्र
पुतिन ने अपने संबोधन में ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP में ब्रिक्स देशों का योगदान 40 प्रतिशत से अधिक रहा है, जबकि इसी अवधि में जी-7 देशों की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का योगदान आधे से ज्यादा रहा है। पुतिन के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था में पारंपरिक केंद्रों की जगह नए विकास केंद्र उभर रहे हैं और ब्रिक्स इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पुतिन ने ब्रिक्स देशों की कारोबारी और तकनीकी क्षमता का उदाहरण देते हुए भारत की महिंद्रा, चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, संयुक्त अरब अमीरात की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम जैसी कंपनियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की सफलता ब्रिक्स देशों के बड़े घरेलू बाजार, तेज शहरीकरण और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है।
AI और डिजिटल तकनीक में सहयोग पर जोर
पुतिन ने कहा कि रूस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में बड़े स्तर पर नवाचार कर रहा है। उन्होंने रूस और ब्रिक्स देशों के आर्थिक रूप से अलग-थलग होने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि रूस मौजूदा और नए दोनों तरह के साझेदारों के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की आलोचना की। पुतिन ने दावा किया कि रूस को 30 हजार से अधिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, उनके अनुसार, रूस ने विदेशी व्यापार का दायरा बदलकर और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाकर इन चुनौतियों का जवाब दिया है।




