द लोकतंत्र/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार मुकाबले की चर्चा सिर्फ बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगियों टीएमसी और कांग्रेस के बीच भी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी ने उपचुनाव में कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल की कोशिश की थी, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के कारण यह कवायद आगे नहीं बढ़ सकी।
TMC ने रखा था सीट शेयरिंग का प्रस्ताव
टीएमसी ने कांग्रेस के सामने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों को लेकर तालमेल का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव के तहत कांग्रेस को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने और टीएमसी को रेजीनगर सीट पर उम्मीदवार उतारने की बात कही गई थी। हालांकि, बंगाल कांग्रेस इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का मानना है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी को अपना संगठन और जनाधार दोबारा मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में तत्काल गठबंधन करने से राज्य में पार्टी के स्वतंत्र राजनीतिक आधार को मजबूत करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह रही कि कांग्रेस ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होंगे, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। दोनों सीटों पर टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
क्यों खाली हुईं नंदीग्राम और रेजीनगर सीटें?
नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी ने इस्तीफा दिया था। वह भवानीपुर विधानसभा सीट से भी निर्वाचित हुए थे। वहीं, मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर से इस्तीफा देकर नोदा विधानसभा सीट के विधायक के तौर पर शपथ ली।
इन सीटों पर भी होंगे उपचुनाव
पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम, पुडुचेरी की थट्टांचावडी विधानसभा सीट और असम की नौगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव प्रस्तावित हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच बढ़ती दूरी का असर पश्चिम बंगाल के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर कितना पड़ेगा।


