द लोकतंत्र/ लुधियाना / टिंकू : लुधियाना में फैक्ट्री में काम करने के दौरान एक मजदूर की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान अशोक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि 3 सितंबर को फैक्ट्री में काम करते समय उनकी अचानक तबीयत खराब हुई थी। इसके करीब 10 दिन बाद 13 सितंबर को निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
मृतक की पत्नी शारदा देवी ने फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता तो अशोक की जान बच सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
तबीयत बिगड़ने के बाद तीन घंटे फैक्ट्री में बैठाकर रखने का आरोप
परिवार के मुताबिक, 3 सितंबर को अशोक फैक्ट्री में अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। पत्नी शारदा देवी का आरोप है कि फैक्ट्री के गेटमैन ने अशोक को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय करीब तीन घंटे तक परिसर में ही बैठाकर रखा। परिजनों के अनुसार, रात लगभग 11 बजे अशोक को घर पहुंचाया गया। घर आने के बाद उनकी हालत और ज्यादा खराब हो गई। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां उनका उपचार शुरू किया गया। करीब दस दिनों तक इलाज चलने के बाद 13 सितंबर को अशोक की मौत हो गई।
परिवार का आरोप है कि यदि फैक्ट्री प्रबंधन ने समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई होती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। इसी वजह से परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
14 साल की नौकरी के बावजूद ESI-PF सुविधा नहीं मिलने का दावा
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि अशोक पिछले 14 से 15 वर्षों से इसी फैक्ट्री में काम कर रहे थे। इतने लंबे समय तक नौकरी करने के बावजूद उन्हें कर्मचारी राज्य बीमा यानी ESI और भविष्य निधि यानी PF जैसी सुविधाएं नहीं दी गईं। शारदा देवी के अनुसार, फैक्ट्री की ओर से अशोक का ईएसआई कार्ड नहीं बनवाया गया और न ही उनके वेतन से पीएफ की कटौती की गई। परिवार का कहना है कि यदि ईएसआई की सुविधा उपलब्ध होती, तो इलाज में आर्थिक मदद मिल सकती थी और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था भी मिल पाती।
मृतक के परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन से जवाब मांगते हुए इंसाफ की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अशोक परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थे और उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल, अशोक की मौत के बाद परिवार सदमे में है। परिजन पूरे मामले की जांच, फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की पड़ताल और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस या संबंधित विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मजदूर को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला और ESI-PF से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।



