द लोकतंत्र/नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर Election Commission के कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधीओं ने केंद्र सरकार, BJP, RSS और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताते हुए BJP, RSS और चुनाव आयोग पर इसे आयोजित करने का आरोप लगाया और इसे ‘देशद्रोह’ करार दिया। वहीं अरविंद केजरीवाल ने प्रेस वार्ता कर सरकार को घेरा।
हालांकि, चुनाव आयोग ने कथित आंतरिक मतभेद और फैसलों में विभाजन की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
वोट चोरी कर Election Commission ने देशद्रोह किया है: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि ‘वोट चोरी’ भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने BJP, RSS और Election Commission पर इसे आयोजित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसे ‘देशद्रोह’ माना जाना चाहिए और न्याय होगा।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उससे जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
14 कथित आपत्तियों की रिपोर्ट से क्यों मचा बवाल?
मामला उस रिपोर्ट के बाद गरमाया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान Election Commission के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट में कथित आपत्तियों को मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने, Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े मामलों से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में चुनावी डेटा के प्रबंधन को अधिक केंद्रीकृत किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जाने का दावा किया गया है।
यही रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
ECI ने दी सफाई,‘फैसले सर्वसम्मति से हुए’
विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने कथित ‘आंतरिक टकराव’ की खबरों पर अपना पक्ष रखा। आयोग के मुताबिक, किसी मुद्दे पर किसी आयुक्त की व्यक्तिगत राय या टिप्पणी को आयोग के अंतिम फैसले से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। Election Commission के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्तों—मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी—की मंजूरी से आयोग के फैसले लिए गए हैं।
आयोग ने विशेष रूप से कहा कि SIR से जुड़े फैसले भी सर्वसम्मति से लिए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सवाल और टिप्पणियां सामने आना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियों को संस्थागत असहमति या टकराव के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
ECI: ‘कुछ टिप्पणियों साक्ष्य नहीं’
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि पिछले 10 महीनों की कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों या अवलोकनों को सामने रखकर पूरी प्रक्रिया का आकलन नहीं किया जा सकता। आयोग के मुताबिक, इस अवधि में बड़ी संख्या में मंजूरियां, फैसले, निर्देश और चुनावी सुधार से जुड़े कदम भी लिए गए हैं। Election Commission ने कहा कि पिछले एक साल में आयोग ने करीब 40 नई पहलें शुरू की हैं और मतदाता सूची के संशोधन, जिसमें SIR भी शामिल है, सहित कई चुनावी सुधारों पर काम किया है। आयोग के अनुसार, ये सभी फैसले पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
Election Commission की सफाई विरोधाभासी हैं?
यही सवाल इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। एक ओर मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। दूसरी ओर, Election Commission का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर उठाए गए सवाल या व्यक्तिगत टिप्पणियां अंतिम संस्थागत निर्णय के बराबर नहीं हैं और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इसलिए फिलहाल विवाद का केंद्र यह है कि कथित आपत्तियों की प्रकृति क्या थी, उन पर आयोग के भीतर किस तरह विचार हुआ और अंतिम फैसलों में उनकी क्या भूमिका रही।
विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने कथित आपत्तियों को गंभीर बताते हुए आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग की है। कुछ विपक्षी दलों ने CEC के खिलाफ कार्रवाई और मामले की जांच की मांग भी उठाई है। वहीं अरविंद केजरीवाल ने प्रेस वार्ता भी किया और सरकार पर कई संगीन आरोप भी लगाई।
वहीं, Election Commission का पक्ष इससे अलग है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों को उसके व्यापक निर्णयों और पहलों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
SIR क्या है और विवाद इतना बड़ा क्यों है?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में नाम, पात्रता और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की जाती है। मौजूदा विवाद में मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form 6, वोटर डेटाबेस और SIR की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। इसी वजह से चुनाव आयोग की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।
वोट चोरी v/s Election Commission की सफाई,
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और ‘देशद्रोह’ वाले बयान ने पहले से चल रहे SIR विवाद को और राजनीतिक रूप से गर्म कर दिया है। कांग्रेस और विपक्ष जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं Election Commission ने कथित आंतरिक टकराव की खबरों को खारिज करते हुए सभी अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। फिलहाल इस विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने हैं—मीडिया रिपोर्ट में दर्ज कथित आपत्तियां और चुनाव आयोग की सर्वसम्मति वाली सफाई। ऐसे में 14 कथित आपत्तियों की वास्तविक प्रकृति, उन पर हुई आंतरिक प्रक्रिया और SIR से जुड़े फैसलों का रिकॉर्ड आने वाले समय में इस बहस के अहम पहलू रहेंगे।
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