द लोकतंत्र: Indore Water Contamination मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। उमंग सिंघार ने इंदौर की स्थिति की तुलना अफ्रीकी गांवों से करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने और कई मौतों का मामला सामने आया था।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोग बीमार
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की वजह से लोगों को उल्टी, दस्त, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था। जांच के दौरान पानी के नमूनों में E. coli और Total Coliform बैक्टीरिया पाए गए थे। इससे पानी के दूषित होने की पुष्टि हुई थी।
मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। स्थानीय लोगों और कांग्रेस की ओर से 36 मौतों का दावा किया गया, जबकि न्यायिक जांच में स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर 35 मौतों का उल्लेख किया गया। आयोग ने इनमें से 22 मौतों को दूषित पानी की घटना से संभावित रूप से जुड़े होने की बात कही।
पाइपलाइन की खराब स्थिति पर रिपोर्ट में सवाल
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने मामले की जांच की। आयोग की अध्यक्षता पूर्व हाई कोर्ट जज सुषिल कुमार गुप्ता ने की। 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में पानी और सीवर पाइपलाइन की स्थिति, उनके रखरखाव और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति 6 फरवरी 2026 तक जारी रहने के रिकॉर्ड मिले। आयोग ने पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को बदलने की प्रक्रिया में देरी को भी जांच के प्रमुख बिंदुओं में शामिल किया।
टेंडर प्रक्रिया में 859 दिन की देरी
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में पाइपलाइन बदलने से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में 859 दिनों तक की देरी का उल्लेख किया गया। आयोग ने इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही से जोड़ा और संबंधित अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ विभागीय जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि घटना केवल एक कारण से नहीं हुई, बल्कि जल आपूर्ति व्यवस्था, पाइपलाइन की स्थिति, रखरखाव और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी से जुड़ी कई कमियों का इसमें योगदान रहा।
मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की सिफारिश
न्यायिक आयोग ने दूषित पानी की घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए 2 से 3 लाख रुपये की सहायता देने का सुझाव दिया गया है।
आयोग ने शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के साथ एक स्वतंत्र राज्य शहरी जल आपूर्ति प्राधिकरण बनाने की सिफारिश भी की है। उमंग सिंघार ने रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और कार्रवाई करने की मांग की है।
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