द लोकतंत्र/नागपुर: विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महाराष्ट्र के नागपुर से पार्टी के लिए राहत भरी खबर आई है। कांग्रेस उम्मीदवार और मौजूदा MLC अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी है। उन्होंने BJP उम्मीदवार और पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया।
खास बात यह है कि नागपुर को भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
40 घंटे से ज्यादा चली मतगणना, दूसरे वरीयता के वोटों ने बदला खेल
नागपुर स्नातक सीट पर मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी और नतीजा आने में 40 घंटे से ज्यादा का समय लगा। शुरुआती मतगणना में BJP के सुधाकर कोहले ने बढ़त बनाई थी, लेकिन अंतिम चरण में तस्वीर बदल गई। पहली वरीयता के वोटों की गिनती के बाद कोहले को 60,924, जबकि वंजारी को 56,630 वोट मिले थे।
यानी BJP उम्मीदवार 4,294 वोटों से आगे थे। हालांकि, कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित मतों का कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य उम्मीदवारों के मतों के हस्तांतरण के बाद वंजारी ने बढ़त बना ली। अंतिम परिणाम में अभिजीत वंजारी को 67,231 और सुधाकर कोहले को 63,960 वोट मिले। इस तरह वंजारी ने 3,271 मतों से जीत दर्ज की।
चार राज्यों की 28 सीटों पर चुनाव, कांग्रेस के प्रदर्शन पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव हुए। शुरुआती नतीजों और रुझानों में कांग्रेस को झटका लगा, खासकर कर्नाटक में जहां भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की। इससे कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।ऐसे माहौल में नागपुर से वंजारी की जीत कांग्रेस के लिए राहत लेकर आई। हालांकि, एक सीट पर जीत को पूरे चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन का निर्णायक संकेत नहीं माना जा सकता, लेकिन इस नतीजे ने कांग्रेस को राजनीतिक जवाब देने का अवसर जरूर दिया।
कौन हैं BJP को मात देने वाले अभिजीत वंजारी?
अभिजीत वंजारी पेशे से वकील हैं और लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू किया था। वह कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI में महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव रह चुके हैं। इसके अलावा युवा कांग्रेस और नागपुर जिला कांग्रेस में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वंजारी का परिवार भी नागपुर की राजनीति में पुराना जुड़ाव रखता है। उनके पिता गोविंदराव वंजारी दक्षिण नागपुर से कांग्रेस विधायक रह चुके थे।
अभिजीत वंजारी ने नागपुर विश्वविद्यालय से स्नातक और कानून की पढ़ाई की। वह शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी संस्था अमर सेवा मंडल के सचिव भी हैं। 2020 में वंजारी ने नागपुर स्नातक सीट से BJP के संदीप जोशी को हराकर जीत दर्ज की थी। अब उन्होंने एक बार फिर इसी सीट पर जीत हासिल कर अपना प्रतिनिधित्व बरकरार रखा है।
नागपुर के नतीजे ने बढ़ाई BJP चिंता
नागपुर में कांग्रेस की जीत ऐसे समय आई है, जब विधान परिषद चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे थे। BJP के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में वंजारी की जीत ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। दूसरी ओर, कर्नाटक में चारों सीटें गंवाने से कांग्रेस के सामने अपने संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल भी बने हुए हैं।
इस नतीजे का व्यापक राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल नागपुर की जीत ने कांग्रेस को चुनावी निराशा के बीच एक अहम राहत जरूर दी है।
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