क्या शिष्यों द्वारा पैर छूने से कम होते हैं शिक्षक के पुण्य? प्रेमानंद महाराज ने बताया आध्यात्मिक समाधान
द लोकतंत्र : भारतीय संस्कृति में ‘गुरु’ को साक्षात परब्रह्म का रूप स्वीकार किया गया है। शिक्षण संस्थानों में आज भी छात्रों द्वारा शिक्षकों के चरण स्पर्श करने की परंपरा अक्षुण्ण है। किंतु, हाल ही में आध्यात्मिक जगत में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरा है— क्या बिना किसी साधना के दूसरों से चरण स्पर्श करवाना पुण्य […]









