द लोकतंत्र : 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 से पहले टैक्सपेयर्स के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संस्था ICAI (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) ने सरकार को एक खास सुझाव दिया है। आईसीएआई का कहना है कि भारत में भी अब पति और पत्नी को एक साथ यानी ‘ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ (Joint ITR) फाइल करने का विकल्प मिलना चाहिए। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मान लेती है, तो लाखों मिडिल क्लास परिवारों की टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
फिलहाल भारत में नियम यह है कि पति और पत्नी दोनों को अपना-अपना टैक्स रिटर्न अलग से फाइल करना पड़ता है। दिक्कत तब आती है जब परिवार में केवल एक ही व्यक्ति कमा रहा हो। मान लीजिए किसी घर में केवल पति नौकरी करते हैं और पत्नी हाउसवाइफ हैं। ऐसी स्थिति में पति की पूरी कमाई पर टैक्स लगता है और वे हाई टैक्स स्लैब में आ जाते हैं, जबकि पत्नी को मिलने वाली बेसिक टैक्स छूट (Basic Exemption) बेकार चली जाती है।
ज्वाइंट टैक्सेशन लागू होने से परिवार की कुल आमदनी को एक इकाई के रूप में देखा जाएगा, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ेगा नहीं बल्कि संतुलित हो जाएगा।
ज्वाइंट ITR से कैसे होगी पैसों की बचत?
ICAI के मुताबिक, ज्वाइंट फाइलिंग से सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को होगा जहाँ सिंगल इनकम है।
- टैक्स स्लैब का फायदा: जब पति-पत्नी की आय जुड़ जाएगी, तो टैक्स स्लैब की सीमा भी बढ़ाई जा सकती है। इससे ज्यादा कमाई होने पर भी टैक्स कम देना पड़ेगा।
- दोगुनी छूट की उम्मीद: सुझाव में यह भी कहा गया है कि ज्वाइंट रिटर्न में बेसिक छूट को दोगुना कर देना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो 8 लाख रुपये तक की सालाना फैमिली इनकम पूरी तरह टैक्स फ्री हो सकती है।
- पारदर्शिता: फिलहाल कई लोग टैक्स बचाने के लिए अपनी कमाई कागजों पर पत्नी या परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम दिखाते हैं। ज्वाइंट ITR आने से ऐसी ‘जुगाड़बाजी’ की जरूरत नहीं पड़ेगी और सिस्टम ज्यादा साफ-सुथरा बनेगा।
दुनिया के कई देशों में पहले से है यह सिस्टम
भारत के लिए यह भले ही नया हो, लेकिन अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल जैसे विकसित देशों में यह सिस्टम सालों से चल रहा है। अमेरिका में इसे ‘मैरिड फाइलिंग ज्वाइंटली’ कहा जाता है। वहां शादीशुदा जोड़ों को यह छूट मिलती है कि वे अपनी इनकम जोड़कर रिटर्न भरें और टैक्स में बड़ी राहत पाएं। यूरोप के कई देशों में भी परिवार को एक यूनिट मानकर ही टैक्स की गणना की जाती है।
अनिवार्य नहीं, होगा एक विकल्प
ICAI ने साफ किया है कि इसे अनिवार्य (Compulsory) नहीं बनाना चाहिए। सरकार को इसे एक विकल्प के तौर पर पेश करना चाहिए। यानी जो पति-पत्नी चाहते हैं कि वे अपनी इनकम जोड़कर टैक्स बचाएं, वे ज्वाइंट रिटर्न चुनें। और जो लोग अपनी फाइल अलग रखना चाहते हैं, वे पुराने सिस्टम के हिसाब से चलते रहें।
अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती हैं, तो यह नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं होगा। इससे न केवल टैक्स बचेगा, बल्कि रिटर्न फाइल करने का झंझट भी आधा रह जाएगा।

