द लोकतंत्र : देश के आगामी आम बजट 2026-27 के प्रस्तुतीकरण की घड़ियाँ समीप आ रही हैं। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र की नजरें पूरी तरह से वित्त मंत्रालय की घोषणाओं पर टिकी हैं। विशेष रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता में वृद्धि इस बार बजट का सबसे प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों का तर्क है कि खेती की इनपुट लागत (Input Cost) में हुई भारी वृद्धि के कारण वर्तमान ₹6,000 की वार्षिक सहायता अब अपर्याप्त सिद्ध हो रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार इस राशि को बढ़ाकर ₹10,000 कर सकती है।
लागत का दबाव: क्यों अनिवार्य है आर्थिक सहायता में वृद्धि?
पिछले तीन वर्षों में वैश्विक और घरेलू कारणों से कृषि क्षेत्र में महंगाई का दबाव अभूतपूर्व रहा है। उर्वरक, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, कीटनाशक और विशेष रूप से डीजल की कीमतों में निरंतर वृद्धि ने किसानों के लाभ मार्जिन को न्यूनतम कर दिया है।
- बढ़ता निवेश बोझ: किसानों के अनुसार, ट्रैक्टरों के रख-रखाव और आधुनिक कृषि यंत्रों के किराये में 30% से 40% की वृद्धि हुई है। ऐसे में सालाना ₹6,000 की मदद, जो तीन किस्तों में मिलती है, एक छोटे किसान की बीज और खाद की बुनियादी जरूरतों को भी पूर्ण नहीं कर पाती।
- ग्रामीण मांग में सुधार: यदि सरकार इस राशि में ₹4,000 की वार्षिक वृद्धि करती है, तो इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण उपभोग (Rural Consumption) पर पड़ेगा। किसानों के हाथ में अतिरिक्त नकदी आने से ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ेगी, जो पूरी जीडीपी के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
PM-किसान: योजना का सफर और उद्देश्य
दिसंबर 2018 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना ने अब तक करोड़ों लघु और सीमांत किसानों को एक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से बिना किसी बिचौलिए के सीधे बैंक खातों में पैसा पहुंचना इसकी सबसे बड़ी सफलता रही है।
- वित्तीय समावेशन: योजना ने करोड़ों किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। 2026 तक, इस योजना के लाभार्थी आधार में भी विस्तार होने की संभावना है, जिससे अधिक भूमिहीन या पट्टेदार किसानों को शामिल किया जा सके।
- स्थिरता की मांग: अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को साधते हुए सरकार को कृषि क्षेत्र में निवेश और कल्याणकारी खर्चों के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बनाना होगा।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य का परिदृश्य
- कृषि नीति विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नकद हस्तांतरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को सिंचाई अवसंरचना और भंडारण सुविधाओं (Cold Storage) के लिए भी बड़े आवंटन करने चाहिए। हालांकि, चुनाव पूर्व बजट न होने के बावजूद, सरकार ग्रामीण असंतोष को कम करने के लिए PM-किसान की राशि में 50% से अधिक की वृद्धि का साहसिक निर्णय ले सकती है। यह न केवल किसानों की क्रय शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय कृषि को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।
निष्कर्षतः, बजट 2026 भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। ₹6,000 से ₹10,000 तक की संभावित वृद्धि न केवल एक चुनावी वादे के रूप में नहीं, बल्कि एक आर्थिक आवश्यकता के रूप में देखी जा रही है। यदि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस मांग को स्वीकार करती हैं, तो यह ग्रामीण भारत के लिए 2026 की सबसे बड़ी सौगात होगी।

