द लोकतंत्र : अक्सर लोग कहते हैं कि प्राइवेट नौकरी में बस काम का बोझ होता है और तारीफ कम मिलती है। लेकिन दिल्ली के एक स्टार्टअप ने इस बात को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। यहाँ के बॉस ने अपने एक पुराने कर्मचारी को ऐसा नायाब तोहफा दिया है, जिसे देख सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं— “बॉस हो तो ऐसा!” कंपनी के फाउंडर्स ने अपने सबसे पुराने कर्मचारी की वफादारी से खुश होकर उसे एक शानदार SUV कार गिफ्ट की है।
एक कैजुअल पार्टी और वो बड़ा सरप्राइज
यह कहानी है इंडियन स्ट्रीटवियर लेबल ‘Bluorng’ की, जिसके फाउंडर्स सिद्धांत सभरवाल और मोकम सिंह हैं। हाल ही में उन्होंने अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी, जहाँ टीम के कई सदस्य मौजूद थे। बातों-बातों में दोनों फाउंडर्स ने कंपनी के शुरुआती दिनों और मुश्किलों के बारे में बात करना शुरू किया। इसी बीच उन्होंने अपने पहले कर्मचारी राहुल ओझा का जिक्र किया, जो कंपनी के साथ पहले दिन से खड़े रहे।
“मेरे साथ काम करना मुश्किल है, पर राहुल रुका रहा”
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सिद्धांत सभरवाल बड़े ही इमोशनल अंदाज़ में कहते दिख रहे हैं, “हमारे साथ काम करना बहुत मुश्किल है। मैंने हमेशा राहुल को बहुत परेशान किया, काम का प्रेशर दिया, लेकिन उसने कभी साथ नहीं छोड़ा। वह हर उतार-चढ़ाव में हमारे साथ बना रहा।” सिद्धांत ने आगे कहा कि किसी भी स्टार्टअप को चलाने के लिए सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि राहुल जैसे लोगों की जरूरत होती है जो एक दीवार की तरह सपोर्ट बनकर खड़े रहें।
मेट्रो की भीड़ को कहें अलविदा
पार्टी के बीच में अचानक सिद्धांत ने राहुल को अपने पास बुलाया और कहा— “राहुल, कल से मेट्रो को भूल जाओ!” इतना कहते ही उन्होंने राहुल के हाथ में एक नई कार की चाबी थमा दी। यह सुनकर पूरा कमरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राहुल और वहां मौजूद बाकी टीम मेंबर्स भी इस सरप्राइज को देखकर दंग रह गए।
महिंद्रा BE 6 की मिली सवारी
चाबी देने के बाद पूरी टीम बाहर गई, जहाँ लाल कपड़े से ढकी हुई एक महिंद्रा BE 6 खड़ी थी। जैसे ही राहुल ने उस पर से चादर हटाई, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राहुल ने तुरंत ड्राइवर सीट संभाली और अपनी नई गाड़ी की पहली सवारी का मजा लिया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं और कर्मचारी के प्रति इस सम्मान की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
यह खबर उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो मानते हैं कि कड़ी मेहनत और वफादारी की कोई कीमत नहीं होती। सही जगह और सही बॉस हो, तो मेहनत का फल कुछ इसी तरह ‘शानदार’ मिलता है।

