द लोकतंत्र : वैश्विक अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार और डिजिटल भुगतान की सुविधा के बीच समकालीन युवाओं की जीवनशैली में व्यापक परिवर्तन आया है। देखा गया है कि करियर की शुरुआत में ही युवा अपनी आय का बड़ा हिस्सा प्रीमियम गैजेट्स, ब्रांडेड परिधानों और लग्जरी यात्राओं पर व्यय कर रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना किसी ठोस वित्तीय योजना (Financial Planning) के किया गया अत्यधिक खर्च भविष्य में गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष की उम्र से पूर्व निवेश की शुरुआत करना न केवल पूंजी बढ़ाने में सहायक है, बल्कि यह कंपाउंडिंग (Chakravarti Byaj) का अधिकतम लाभ भी प्रदान करता है।
आकस्मिक कोष: अदृश्य संकटों से सुरक्षा कवच
फाइनेंशियल प्लानिंग का प्रथम स्तंभ ‘इमरजेंसी फंड’ का निर्माण करना है।
- विशेषज्ञ परामर्श देते हैं कि प्रत्येक कामकाजी युवा के पास कम से कम 3 से 6 महीने के नियमित खर्चों के बराबर नकद राशि होनी चाहिए। नौकरी में अनिश्चितता या अचानक चिकित्सीय आवश्यकता के समय यह कोष मानसिक शांति और आर्थिक सहारा प्रदान करता है।
निवेश की शक्ति: जल्दी शुरुआत, बड़ी पूंजी
निवेश की आदत डालना महज पैसा बचाना नहीं, पैसों से काम कराना है।
- यदि कोई व्यक्ति 22 साल की उम्र में एक छोटा निवेश (जैसे SIP) शुरू करता है, तो 30 साल के बाद वह राशि एक बड़ा कोष (Corpus) बन जाती है। छोटा निवेश लंबे समय में महंगाई को मात देने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- मासिक बजट तैयार करने से फिजूलखर्ची पर अंकुश लगता है। आय और व्यय का सही विश्लेषण ही अतिरिक्त पूंजी को निवेश योग्य बनाता है।
क्रेडिट प्रबंधन: सिबिल स्कोर और भविष्य के ऋण
आज के दौर में सिबिल (CIBIL) स्कोर आपकी वित्तीय साख का प्रमाण है। क्रेडिट कार्ड का अत्यधिक उपयोग और देय राशि के भुगतान में देरी स्कोर को प्रभावित करती है। एक मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल होने पर भविष्य में गृह ऋण (Home Loan) या व्यवसाय ऋण कम ब्याज दरों पर प्राप्त किया जा सकता है।
आने वाले दशक में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ती महंगाई के मद्देनजर युवाओं को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी। निवेश को केवल विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य दायित्व समझना होगा। निष्कर्षतः, अनुशासन और सही वित्तीय शिक्षा ही युवाओं को आर्थिक स्वतंत्रता की ओर ले जा सकती है।

