द लोकतंत्र : भारतीय बुलियन मार्केट में दिसंबर का महीना ऐतिहासिक हलचल का साक्षी बन रहा है। रविवार, 21 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमतों ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए ₹2,14,000 प्रति किलोग्राम का नया शिखर छू लिया है। सोने की कीमतें भी लगातार मजबूत हो रही हैं, जहाँ 24 कैरेट गोल्ड दिल्ली जैसे महानगरों में ₹1,34,330 के स्तर पर पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और औद्योगिक मांग में हुई अचानक वृद्धि ने इन धातुओं को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में स्थापित कर दिया है।
चांदी का स्वर्ण युग: 126% का वार्षिक रिटर्न
चांदी की कीमतों में इस वर्ष आई तेजी ने शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है।
- ऐतिहासिक उछाल: साल 2025 में चांदी ने करीब 126% का रिटर्न दिया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर ही चांदी ₹16,000 महंगी हुई है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: वैश्विक बाजार में सोने का हाजिर भाव $4,322.51 प्रति औंस पर स्थिर बना हुआ है, जो भारतीय बाजारों में तेजी का प्रमुख कारण है।
महानगरों में सोने की दरें: एक तुलनात्मक रिपोर्ट
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें स्थानीय करों और मेकिंग चार्जेस के कारण भिन्न हैं:
- चेन्नई: यहाँ सोना देश में सबसे महंगा बिक रहा है, जहाँ 24 कैरेट की कीमत ₹1,35,280 तक पहुंच गई है।
- दिल्ली व लखनऊ: राजधानी सहित उत्तर भारत के शहरों में 24 कैरेट गोल्ड ₹1,34,330 प्रति 10 ग्राम पर है।
- मुंबई व कोलकाता: इन व्यापारिक केंद्रों में दरें ₹1,34,180 के स्तर पर बनी हुई हैं।
कीमतों में तेजी के प्रमुख कारण
आर्थिक विश्लेषकों ने इस उछाल के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:
- वैश्विक मुद्रास्फीति: प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक फिएट करेंसी के बजाय सोने पर भरोसा कर रहे हैं।
- जियोपॉलिटिकल तनाव: वैश्विक सीमा विवादों ने बुलियन मार्केट को मजबूती प्रदान की है।
- औद्योगिक मांग: इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी की बढ़ती खपत ने सप्लाई चेन पर दबाव बनाया है।
निवेशकों के लिए भविष्य का संकेत
- बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो चांदी जल्द ही ₹2.5 लाख के आंकड़े को भी पार कर सकती है। हालांकि, सोने में अल्पकालिक करेक्शन (Correction) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्षतः, सोना और चांदी खरीदने से पूर्व स्थानीय दरों और शुद्धता (Hallmark) की जांच अनिवार्य है। यह तेजी न केवल महंगाई का संकेत है, बल्कि यह भारतीय उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और निवेश मानसिकता के बदलते स्वरूप को भी दर्शाती है।

