द लोकतंत्र : मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी जंग की वजह से गहराते गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। भारत अब अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के लिए केवल खाड़ी देशों के भरोसे नहीं रहेगा। सरकार ने अब अमेरिका, रूस, नॉर्वे और कनाडा जैसे नए देशों से गैस की खेप मंगानी शुरू कर दी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में जानकारी दी कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक होने के नाते भारत अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है।
होटल और रेस्तरां के लिए बदल गए नियम
गैस की खपत को कम करने और घरेलू रसोई तक सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है।
- वैकल्पिक ईंधन: पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि होटल और रेस्तरां सेक्टर को अगले एक महीने तक बायोमास, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की छूट दी जाए।
- मकसद: इसका मुख्य उद्देश्य कमर्शियल सेक्टर में एलपीजी की खपत को घटाना है ताकि देश के 33.3 करोड़ घरों में खाना पकाने के लिए गैस की कमी न हो।
60% आयात का बदला रास्ता
पहले भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता था, लेकिन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में बढ़ते तनाव के कारण अब खरीद के स्रोत बदल दिए गए हैं।
- आपातकालीन शक्तियां: सरकार ने रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं और उद्योगों को दी जाने वाली सप्लाई में कटौती करें।
- 70% बाहरी सप्लाई: मंत्री ने बताया कि अब भारत के कुल तेल आयात में होर्मुज के रास्ते से बाहर से आने वाले माल की हिस्सेदारी 70% तक पहुँच गई है, जो सुरक्षा के लिहाज से अच्छा संकेत है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर नकेल
गैस की कमी की खबरों के बीच कुछ लोग जमाखोरी करने लगे थे। इसे रोकने के लिए सरकार ने नया नियम बनाया है। अब तेल कंपनियां राज्यों के साथ मिलकर कमर्शियल एलपीजी की 20% जरूरत का हिस्सा खुद आवंटित करेंगी। इससे बिचौलियों द्वारा की जाने वाली कालाबाजारी पर लगाम लगेगी।
घबराने की जरूरत नहीं: सरकार का भरोसा
हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने कहा, “बाजार में जो घबराहट (Panic) दिख रही है, वह उपभोक्ताओं की चिंता की वजह से है। हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है और वैकल्पिक रास्तों से एलएनजी की खेप लगभग रोज भारत पहुँच रही है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर युद्ध लंबा भी चलता है, तो भी भारत के पास स्थिति संभालने के पर्याप्त इंतजाम हैं।
सरकार के इन कदमों से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद आम आदमी की रसोई को सुरक्षित रखने की पूरी तैयारी कर ली गई है। नए देशों से आयात और घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होगी।

