द लोकतंत्र : आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की है। जैसे-जैसे डेडलाइन करीब आ रही है, विभाग ने बड़ी संख्या में उन टैक्सपेयर्स को ईमेल और एसएमएस भेजे हैं, जिनके डेटा में विसंगतियां (Mismatch) पाई गई हैं। रिस्क मैनेजमेंट प्रोविजन के तहत कई रिफंड रोक दिए गये हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कर चोरी रोकने और डेटा सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में, टैक्सपेयर्स के पास अपनी गलतियों को सुधारने के लिए धारा 139(5) के अंतर्गत संशोधित रिटर्न दाखिल करने के लिए अब मात्र सात दिन शेष हैं।
संशोधित रिटर्न (Revised Return): धारा 139(5) का महत्व
आयकर अधिनियम की यह विशिष्ट धारा टैक्सपेयर्स को अनजाने में हुई चूक सुधारने का वैधानिक अधिकार देती है।
- सुधार के क्षेत्र: यदि मूल रिटर्न में आय कम दिखाई गई हो, गलत डिडक्शन क्लेम किया गया हो या गलत फॉर्म का चयन हुआ हो, तो संशोधित रिटर्न ही एकमात्र विकल्प है।
- अंतिम तिथि: AY 2025-26 के लिए संशोधित ITR दाखिल करने की अंतिम सीमा 31 दिसंबर 2025 है। इसके बाद कोई भी सुधार स्वीकार्य नहीं होगा।
ऑनलाइन संशोधन कैसे करें?
ई-फाइलिंग पोर्टल पर संशोधित रिटर्न दाखिल करना अत्यंत सरल है, बशर्ते आपके पास ओरिजिनल रिटर्न का विवरण हो:
- पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद ‘e-File’ मेन्यू में जाकर ITR विकल्प चुनें।
- यहाँ ‘Original/Revised Return’ सेलेक्ट करें।
- फॉर्म में ‘Revised return under section 139(5)’ चुनना अनिवार्य है।
- संशोधन के लिए ओरिजिनल ITR का Acknowledgement Number और फाइलिंग की तारीख दर्ज करनी होगी।
संशोधित (Revised) vs विलंबित (Belated) ITR
| तुलना का आधार | संशोधित ITR (Revised) | विलंबित ITR (Belated) |
| यह क्या है? | यदि आपने रिटर्न भर दिया है और उसमें कोई गलती (जैसे आय कम दिखाना या डिडक्शन भूलना) हो गई है, तो उसे सुधारने के लिए। | यदि आपने तय डेडलाइन (31 जुलाई) तक अपना रिटर्न फाइल ही नहीं किया है, तो उसे भरने के लिए। |
| आयकर की धारा | धारा 139(5) के तहत फाइल होता है। | धारा 139(4) के तहत फाइल होता है। |
| पेनल्टी (जुर्माना) | इसमें कोई जुर्माना नहीं लगता (क्योंकि आपने समय पर फाइल किया था)। | इसमें ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना (Late Fee) देना पड़ता है। |
| ब्याज | केवल तभी देना होता है यदि सुधार के बाद आपका अतिरिक्त टैक्स बन रहा हो। | बकाया टैक्स पर ब्याज अनिवार्य रूप से देना पड़ता है। |
| नुक़सान का लाभ | इसमें आप पुराने सालों के ‘घाटे’ (Losses) को आगे ले जा सकते हैं। | इसमें (बिजनेस या कैपिटल गेन के) घाटे को कैरी-फॉरवर्ड (Carry Forward) नहीं किया जा सकता। |
अंतिम समय की सावधानियां
कर सलाहकारों का कहना है कि रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की कोई सीमा नहीं है, किंतु असेसिंग ऑफिसर द्वारा असेसमेंट पूरा होने से पहले ही यह कार्य हो जाना चाहिए। यदि डाटा मिसमैच के कारण नोटिस आया है, तो AIS (Annual Information Statement) से अपनी आय का मिलान जरूर करें।
31 दिसंबर की समय सीमा न केवल नया रिटर्न भरने के लिए, बल्कि पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए भी अंतिम है। संशोधित ITR फाइल करना एक सुरक्षित विकल्प है, जिससे भविष्य में आयकर विभाग की कार्यवाही और जुर्माने से बचा जा सकता है।

