द लोकतंत्र : ईरान से जुड़े बढ़ते वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया की अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। गुरुवार, 12 मार्च 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा जारी ये आंकड़े बताते हैं कि आम आदमी की रसोई और जेब पर दबाव बढ़ना शुरू हो गया है।
महंगाई के ताज़ा आंकड़े: जनवरी बनाम फरवरी
NSO की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21% हो गई है। तुलना करें तो जनवरी में यह दर 2.74% थी। खास बात यह है कि ये आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला के आधार पर तैयार किए गए हैं, जो बाजार की वर्तमान स्थिति को और अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं।
थाली का स्वाद हुआ फीका: खाद्य महंगाई में उछाल
खुदरा महंगाई के साथ-साथ खाद्य महंगाई (Food Inflation) ने भी झटका दिया है।
- जनवरी में खाद्य महंगाई दर 2.13% थी।
- फरवरी में यह तेजी से बढ़कर 3.47% पर पहुँच गई है।
क्या हुआ महंगा और कहाँ मिली राहत?
बाजार में कई वस्तुओं की कीमतों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है:
- महंगी हुईं चीजें: सोना और चांदी के आभूषणों के साथ-साथ हीरा और प्लैटिनम ज्वेलरी के दाम बढ़ गए हैं। सब्जियों में टमाटर और फूलगोभी के साथ नारियल और खोपरा भी महंगे हुए हैं।
- सस्ती हुईं चीजें: राहत की बात यह है कि रसोई की बेसिक चीजें जैसे लहसुन, प्याज और आलू के दाम घटे हैं। इसके अलावा अरहर दाल और लीची की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।
गांव बनाम शहर: कहाँ कितनी महंगाई?
महंगाई का असर ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग-अलग रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, गांवों में महंगाई की मार शहरों के मुकाबले ज्यादा रही है:
- ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर: 3.37%
- शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर: 3.02%
एक्सपर्ट्स की राय: ईरान संकट बढ़ाएगा मुश्किल?
जानकारों का मानना है कि यदि ईरान और पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊंची जा सकती हैं। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के मुताबिक, सीपीआई (CPI) में स्थिरता आना बहुत जरूरी है। अगर यह स्थिर रहता है, तो सरकार के लिए महंगाई भत्ते (DA) और सरकारी बॉन्ड जैसे वित्तीय खर्चों का सही अनुमान लगाना आसान हो जाता है।
बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी को अपने बजट को फिर से प्लान करने की जरूरत है। ग्लोबल हालातों को देखते हुए फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

